हरतालिका तीज 2026: हरतालिका तीज को लेकर इस बार लोगों के बीच तारीख को लेकर असमंजस बना हुआ है कि व्रत 13 सितंबर को रखा जाएगा या 14 सितंबर को। पंचांग की गणना के अनुसार इस वर्ष हरतालिका तीज का व्रत सोमवार, 14 सितंबर 2026 को रखा जाएगा। यह व्रत भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। तृतीया तिथि 13 सितंबर की सुबह शुरू होगी, लेकिन 14 सितंबर को सूर्योदय के समय तृतीया तिथि विद्यमान रहेगी। इसी वजह से व्रत की मुख्य तिथि 14 सितंबर मानी जाएगी।
13 सितंबर को क्यों नहीं रखा जाएगा व्रत?
हरतालिका तीज की तारीख तय करने में उदया तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। पंचांग के अनुसार तृतीया तिथि 13 सितंबर को सुबह करीब 7:08 बजे शुरू होगी और 14 सितंबर को सुबह करीब 7:06 बजे समाप्त हो जाएगी। 13 सितंबर को सूर्योदय के समय तृतीया तिथि नहीं रहेगी, जबकि 14 सितंबर के सूर्योदय पर तृतीया मौजूद होगी। इसी आधार पर इस वर्ष हरतालिका तीज 14 सितंबर को मनाई जाएगी।
हरतालिका तीज पूजा का शुभ मुहूर्त
हरतालिका तीज पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विशेष महत्व है। दिल्ली के पंचांग के अनुसार 14 सितंबर को प्रातःकाल पूजा का शुभ समय सुबह 6:05 बजे से 7:06 बजे तक रहेगा। अलग-अलग शहरों में सूर्योदय के समय में अंतर होने के कारण पूजा के मुहूर्त में कुछ बदलाव हो सकता है। इसलिए व्रती अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार समय जरूर देख लें।
शिव-पार्वती की पूजा से जुड़ी है परंपरा
धार्मिक मान्यता के अनुसार हरतालिका तीज का संबंध माता पार्वती की भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए की गई कठोर तपस्या से है। इस दिन महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं। कई स्थानों पर मिट्टी या बालू से शिव-पार्वती की प्रतिमाएं बनाकर उनका पूजन करने की परंपरा है। विवाहित महिलाएं पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से व्रत रखती हैं, जबकि अविवाहित महिलाएं मनचाहे जीवनसाथी की कामना से यह व्रत करती हैं। ये धार्मिक मान्यताएं हैं।
कैसे करें हरतालिका तीज की पूजा?
हरतालिका तीज के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें। पूजा स्थल को साफ करके भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। इसके बाद जल, पंचामृत, बेलपत्र, फूल, फल, अक्षत और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें। शिव-पार्वती की पूजा के बाद हरतालिका तीज की कथा का पाठ और आरती करें। व्रत को लेकर अलग-अलग क्षेत्रों में परंपराएं भिन्न हो सकती हैं। कई महिलाएं इस दिन निर्जला व्रत भी रखती हैं, लेकिन स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर कठोर उपवास करने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।