रियाणा विधानसभा के शीतकालीन सत्र का पहला दिन सियासी हलचल से भरपूर रहा, लेकिन अंत में तस्वीर पूरी तरह साफ हो गई। जिस जनता ने वोट देकर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की सरकार पर भरोसा जताया था, वही भरोसा सदन के भीतर भी मजबूती से दिखा। कांग्रेस सरकार को घेरने और गिराने की मंशा से अविश्वास प्रस्ताव लेकर आई, लेकिन रणनीति की कमी के चलते वह खुद ही बैकफुट पर चली गई। सदन में बहस शुरू होते ही हालात ऐसे बने कि कांग्रेस के लिए आगे टिकना मुश्किल हो गया।
वॉकआउट से पलटा खेल
कांग्रेस ने सरकार पर जनादेश की चोरी और चुनावी धांधली जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था। नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र हुड्डा ने मतदाता सूची में गड़बड़ी और सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का मुद्दा उठाया। शुरुआत में कांग्रेस ने तेवर सख्त दिखाए, लेकिन जैसे ही बहुमत की सच्चाई सामने आई, विपक्ष दबाव में नजर आने लगा। इसी बीच कांग्रेस विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया। वॉकआउट के साथ ही प्रस्ताव पर वोटिंग की नौबत ही नहीं आई और अविश्वास प्रस्ताव औपचारिक रूप से गिर गया।
सैनी का पलटवार
इस पूरे घटनाक्रम में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पूरी तरह आत्मविश्वास में नजर आए। उन्होंने करीब डेढ़ घंटे के भाषण में कांग्रेस के हर आरोप को सिरे से खारिज किया। सीएम सैनी ने साफ कहा कि हरियाणा की जनता ने तीसरी बार भाजपा को चुना है और विपक्ष इस जनादेश को स्वीकार नहीं कर पा रहा। उन्होंने अविश्वास प्रस्ताव को जल्दबाजी में लाया गया कदम बताया और तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस खुद अपने प्रस्ताव पर भरोसा नहीं दिखा सकी। विकास, पारदर्शिता और सुशासन को सरकार की पहचान बताते हुए उन्होंने कहा कि जनता के फैसले से बड़ा कोई फैसला नहीं होता।
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राजनीतिक संदेश साफ
कांग्रेस के बाहर जाने के बाद सदन में सिर्फ सत्ता पक्ष के विधायक मौजूद रहे और स्पीकर ने नियमों के तहत प्रस्ताव खारिज होने का ऐलान कर दिया। 90 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा पहले से ही सहयोगियों और निर्दलीयों के साथ बहुमत में है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि कांग्रेस का यह कदम सरकार गिराने से ज्यादा एक राजनीतिक संदेश देने की कोशिश थी, लेकिन वॉकआउट ने उसी संदेश को कमजोर कर दिया। वहीं सैनी सरकार ने यह साफ कर दिया कि वह जनता के भरोसे पर टिकी है और विपक्ष के दबाव से डगमगाने वाली नहीं। इस दिन ने हरियाणा की राजनीति में यह साबित कर दिया कि सदन में वही टिकता है, जिसके साथ जनता खड़ी होती है।