हरियाणा का रोहतक इन दिनों सिर्फ एक हादसे की वजह से नहीं, बल्कि दो मुख्यमंत्रियों की तीखी बयानबाजी की वजह से भी सुर्खियों में है। बास्केटबॉल खिलाड़ी हार्दिक राठी की दर्दनाक मौत ने पूरे प्रदेश को हिला दिया था। प्रैक्टिस के दौरान बास्केट का भारी पोल गिरा और उसकी चपेट में आकर हार्दिक ने वहीं दम तोड़ दिया। इस घटना ने खेल जगत को बड़ा झटका दिया, लेकिन इसके बाद जो माहौल बना, उसने हरियाणा और पंजाब की राजनीति में जबरदस्त गर्मी ला दी। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान परिवार से मिलने पहुंचे और यही कदम हरियाणा-पंजाब के बीच राजनीतिक जंग की नई शुरुआत बन गया।
हार्दिक राठी के परिवार से मुलाकात के बाद पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने खुलकर हरियाणा की खेल नीति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी खेल प्रतिभा वाले प्रदेश में खिलाड़ी मैदान पर मर रहे हैं और प्रशासन सो रहा है। मान ने खेल सुविधाओं की हालत पर सवाल उठाते हुए कहा कि खिलाड़ियों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए, लेकिन हरियाणा में खेल ढांचा लचर है। भगवंत मान के इस बयान के बाद हरियाणा में सियासत और ज्यादा तीखी हो गई। मान के आरोपों ने चर्चा को पड़ोसी राज्यों से लेकर दिल्ली तक पहुंचा दिया।
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नायब सिंह सैनी का पलटवार, खेल से ज्यादा नशे पर ध्यान दें
भगवंत मान के बयान के बाद हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी चुप नहीं बैठे। उन्होंने सीधे-सीधे कहा कि भगवंत मान पहले अपने राज्य में नशे को रोकें, फिर हरियाणा पर सवाल उठाएं। सैनी ने कहा कि पंजाब में नशा इतना बढ़ चुका है कि युवाओं का भविष्य खतरे में है और मुख्यमंत्री को खिलाड़ियों की मौत पर राजनीति करने की जगह अपने घर की सफाई करनी चाहिए। उनके अनुसार पंजाब में लोग नौकरी नहीं, नशे से मुक्ति की मांग कर रहे हैं। नायब सैनी का यह बयान सोशल मीडिया पर खूब वायरल होने लगा और बहस और भड़क उठी।
हार्दिक का मामला कैसे बना बड़ा राजनीतिक मुद्दा
हार्दिक राठी की मौत सिर्फ एक हादसा थी, लेकिन जैसे-जैसे बयानबाजी बढ़ती गई, मामला राजनीति का एक बड़ा मोर्चा बन गया। पंजाब CM के आरोपों के बाद हरियाणा सरकार हरकत में आई। सरकार ने खेल अधिकारी अनूप सिंह को निलंबित कर दिया और पूरे मामले की जांच के लिए कमेटी गठित की गई। खेल मंत्री गौरव गौतम ने कहा कि हार्दिक के परिवार की हर मांग पूरी की जाएगी और सरकार खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर नई व्यवस्था बनाने पर काम कर रही है। लेकिन विपक्ष यह सवाल उठाता रहा कि कार्रवाई मौत के बाद क्यों? पहले सुरक्षा क्यों नहीं बढ़ाई गई?
तंज पर तंज, राजनीति गरम और जनता हैरान
दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बीच चले आरोप-प्रत्यारोप ने माहौल ऐसा बनाया कि खिलाड़ी, खेल और सुरक्षा सब कहीं पीछे छूट गए। भगवंत मान ने जहां हरियाणा की खेल सुविधाओं को जिम्मेदार ठहराया, वहीं नायब सिंह सैनी ने उल्टा उन्हें उनके वादों की याद दिलाई। सैनी ने कहा कि मान और केजरीवाल ने कहा था कि एक महीने में पंजाब से नशा खत्म कर देंगे, लेकिन आज हालात और बदतर हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि पंजाब में सुबह नौ बजे तक सब ठीक लगता है, लेकिन शाम के बाद हालात कौन देखता है, यह सबको पता है।
खिलाड़ी सुरक्षित होंगे या राजनीति और तेज होगी?
हार्दिक राठी की मौत ने पूरे देश में यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या खिलाड़ियों की सुरक्षा सिर्फ भाषणों में ही रह जाएगी? पंजाब और हरियाणा दोनों राज्यों में चर्चा का केंद्र हार्दिक की मौत से ज्यादा दो मुख्यमंत्रियों की बॉडी लैंग्वेज बन गई। हरियाणा सरकार कह रही है कि खिलाड़ियों के लिए नई सुरक्षा नीति तैयार की जाएगी, जबकि पंजाब सरकार लगातार हरियाणा पर निशाना साधे हुए है। अब देखने वाली बात यह है कि यह बयानबाजी खिलाड़ियों के हित में कोई ठोस बदलाव लाएगी या यह मुद्दा भी बाकी मुद्दों की तरह सिर्फ राजनीति की भीड़ में दब जाएगा।