हरियाणा और पंजाब में अब विदेश जाना एक स्टेटस सिंबल बन चुका है. गांवों में जिस युवक ने अमेरिका या कनाडा का टिकट काट लिया, वो मानो सेलिब्रिटी बन जाता है. यही दिखावे की दौड़ आज युवाओं को दलदल में धकेल रही है. करनाल, जींद, कैथल, कुरुक्षेत्र और पंजाब के कई इलाकों से हजारों युवक डंकी रूट के सहारे अमेरिका जाने की कोशिश में अपनी जिंदगी दांव पर लगा रहे हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक 650 से ज्यादा युवाओं को डिपोर्ट किया जा चुका है. सपनों के पीछे भागते-भागते न जाने कितनों के घर उजड़ गए और कितनों की लाशें भी नहीं मिल पाईं.
आखिर क्या है ये डंकी रूट?
डंकी रूट यानी वो खतरनाक और अवैध रास्ता, जिसके जरिए एजेंट युवाओं को भारत से दुबई, कजाकिस्तान, सेनेगल, फिर पनामा और मैक्सिको के रास्ते अमेरिका पहुंचाने का झांसा देते हैं. एजेंट 40 से 60 लाख रुपये तक वसूलते हैं और वादा करते हैं बस अमेरिका पहुंच जाओगे, फिर सब सेट है लेकिन हकीकत ये है कि अधिकतर युवक रास्ते में पकड़े जाते हैं या महीनों जेलों में सड़ते हैं. कई तो लापता तक हो जाते हैं. इस सफर में जंगल, नदी, डकैती और मौत हर कदम पर साथ रहती है, पर डॉलर की चमक में ये सब पीछे छूट जाता है.
फर्जी एजेंटों का चल रहा खतरनाक खेल
हरियाणा और पंजाब में इमीग्रेशन एजेंटों की लूट बेकाबू है आंकड़ों के मुताबिक, जहां सिर्फ 24 लाइसेंस प्राप्त एजेंट हैं, वहीं 1000 से ज्यादा फर्जी एजेंट खुलेआम सक्रिय हैं. पिछले सात सालों में 3000 से ज्यादा एजेंट गिरफ्तार हुए, पर धंधा बंद नहीं हुआ. ये एजेंट युवाओं को सपनों की कीमत ऐसे बताते हैं कि परिवार जमीन-जायदाद बेच देता है. हकीकत में, अमेरिका पहुंचने के बाद खाने-रहने के खर्च और टैक्स काटकर उनके हाथ में मुश्किल से 60-80 हजार रुपये बचते है. जो सपना 10 गुना कमाई का था, वो हकीकत में सिर्फ दो गुना भी नहीं निकलता
कब टूटेगा डॉलर के सपनों का जाल?
हरियाणा सरकार ने फरवरी 2025 में डंकी रूट पर सख्त कानून बनाया, एसआईटी गठित की, हेल्पलाइन जारी की लेकिन जमीन पर हालात नहीं बदले. नियमावली अब तक लागू नहीं हो सकी और फर्जी एजेंटों का खेल जारी है. कानून विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस गोरखधंधे को खत्म करना है तो जांच का जिम्मा केंद्रीय एजेंसियों को देना होगा. विशेषज्ञ कहते हैं कि गांव-गांव में रोजगार के अवसर बढ़ाने, एजेंटों पर सख्ती और जागरूकता फैलाने से ही इस डॉलर के जाल को तोड़ा जा सकता है. वरना हरियाणा और पंजाब के गांवों से बेटों का पलायन और माताओं की आंखों के आंसू यूं ही बहते रहेंगे.