UP government on Notices: इलाहबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में बढ़ते ‘गन कल्चर’ और हथियार लाइसेंस के दुरुपयोग पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने योगी आदित्यनाथ सरकार, सभी जिलाधिकारियों, पुलिस कमिश्नरों और एसएसपी से जवाब मांगा है कि आपराधिक मामलों में नाम आने के बावजूद कई प्रभावशाली लोगों को हथियार लाइसेंस कैसे जारी किए गए।
हाई कोर्ट ने उठाए गंभीर सवाल
न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने कहा कि प्रदेश में हथियार लाइसेंस जारी करने, नवीनीकरण और ट्रांसफर की प्रक्रिया में भारी लापरवाही बरती जा रही है। कोर्ट ने साफ कहा कि सार्वजनिक रूप से हथियारों का प्रदर्शन समाज में भय और असुरक्षा का माहौल पैदा करता है और कानून व्यवस्था को कमजोर करता है।
हलफनामे में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े
राज्य सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे के मुताबिक प्रदेश में अब तक 10 लाख से ज्यादा हथियार लाइसेंस जारी किए जा चुके हैं। वहीं 23 हजार से ज्यादा आवेदन लंबित हैं। अदालत को यह भी बताया गया कि 6 हजार से अधिक ऐसे लोगों को लाइसेंस मिले हैं, जिन पर दो या उससे ज्यादा आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए सरकार से जवाब मांगा है।
इन 19 लोगों के नाम पर मांगी गई जानकारी
अदालत ने जिन प्रभावशाली लोगों के हथियार लाइसेंस और सुरक्षा व्यवस्था पर जानकारी मांगी है, उनमें रघुराज प्रताप सिंह, धंनजय सिंह, ब्रिज भूषण शरण सिंह समेत कई नाम शामिल हैं। इसके अलावा सुशील सिंह, विनीत सिंह, अजय मरहद, सुजीत सिंह बेलवा, उपेंद्र सिंह गुड्डू, पप्पू भौकाली, इंद्रदेव सिंह, सुनील यादव, फरार अजीम, बादशाह सिंह, संग्राम सिंह, सुल्लू सिंह, चुलबुल सिंह, सनी सिंह, छुन्नू सिंह और डॉ. उदय भान सिंह के नाम भी सूची में हैं।
26 मई को होगी अगली सुनवाई
हाई कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि सभी जानकारी शपथ पत्र के साथ पेश की जाए और कोई तथ्य छिपाया न जाए। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि जानकारी छिपाने पर संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार माना जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 26 मई को होगी।