शेयर बाजार में आई तेज गिरावट के बीच एचडीएफसी बैंक के शेयरों में भारी बिकवाली ने निवेशकों को चौंका दिया। कारोबार के दौरान बैंक का शेयर करीब 9 फीसदी तक टूट गया, जिससे कंपनी के मार्केट कैप में ₹1 लाख करोड़ से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। दिन के अंत में शेयर 5.13% गिरकर ₹799.70 पर बंद हुआ, जो मार्च 2020 के बाद सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है।
इस्तीफे ने बढ़ाई चिंता
इस बड़ी गिरावट की मुख्य वजह बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन और इंडिपेंडेंट डायरेक्टर अतनु चक्रवर्ती का अचानक इस्तीफा रहा। उन्होंने अपने इस्तीफे में संकेत दिया कि पिछले दो वर्षों में बैंक में हुई कुछ घटनाएं उनके व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिकता के अनुरूप नहीं थीं। इस बयान ने बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी, जिसके चलते निवेशकों ने तेजी से शेयर बेचने शुरू कर दिए।
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कौन हैं अतनु चक्रवर्ती
अतनु चक्रवर्ती 1985 बैच के गुजरात कैडर के आईएएस अधिकारी रहे हैं। वह वित्त मंत्रालय में आर्थिक मामलों के सचिव के पद से अप्रैल 2020 में रिटायर हुए थे। इसके अलावा वह वर्ल्ड बैंक बोर्ड में भारत के ऑल्टरनेट गवर्नर और आरबीआई के सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के सदस्य भी रह चुके हैं। उन्होंने एनआईटी कुरुक्षेत्र से इंजीनियरिंग, आईसीएफएआई हैदराबाद से बिजनेस फाइनेंस में पीजी डिप्लोमा और यूनिवर्सिटी ऑफ हल (ब्रिटेन) से एमबीए किया है।
बैंक ने क्या दिया जवाब
अतनु के इस्तीफे के बाद एचडीएफसी बैंक ने स्थिति संभालने की कोशिश की है। आरबीआई की मंजूरी के बाद पूर्व सीईओ केकी मिस्त्री को अंतरिम पार्ट-टाइम चेयरमैन नियुक्त किया गया है। बैंक की ओर से आयोजित कॉन्फ्रेंस कॉल में उन्होंने स्पष्ट किया कि संस्था में किसी तरह का पावर स्ट्रगल या बड़े मतभेद नहीं हैं और बोर्ड स्तर पर स्थिति सामान्य है।
निवेशकों के लिए क्या संकेत
हालांकि बैंक प्रबंधन ने हालात सामान्य होने का भरोसा दिया है, लेकिन इस्तीफे के पीछे की वजहों को लेकर बाजार में अभी भी सवाल बने हुए हैं। यही कारण है कि निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं और आने वाले दिनों में शेयर की चाल पर सभी की नजर बनी रहेगी।