यूपी के बुलंदशहर में एसएसपी दिनेश कुमार सिंह ने घरेलू विवादों और दहेज उत्पीड़न के आरोपों के मामलों की शीघ्रता से काउंसलिंग कराकर निस्तारण कराने का अभियान चलाए। इसके लिए बकायदा महिला सैल और थानों में बनी महिला हेल्प डेस्क को सक्रियता से कार्य करने के निर्देश दिए.. जिसके परिणाम स्वरूप जनपद भर में एक महीने में 66 परिवारों को काउंसलिंग कराकर स्वेच्छा से एक बार फिर जोड़ दिया और उनके परिवार में खुशियां लौट आई। आइये जानते हैं क्या होती है असली पुलिस..
66 परिवारों की लौटाई खुशियां
सही मायने में पुलिस का नाम जहन में आते ही एक आम जन का डर खत्म हो जाता है. क्योंकि पुलिस एक सिंबल नहीं है एक भरोसा है, जिस पर देश की आम जनता आंख मूंदकर विश्वास करती है.. कुछ भी गलत होता है तो सिर्फ एक ही शब्द मुंह से निकलता है जंगलराज थोड़ा है पुलिस है.. लेकिन वर्तमान में पुलिसिंग के मायने बदल चुके हैं. लेकिन एकता में अनेकता के सपने को साकार किया है बुलंदशहर पुलिस ने.. पिछले 30 दिनों में लगभग 66 परिवारों की खुशियां लौटाई हैं..
क्या कहना है इनका
एसएसपी दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि जनपद में जब कार्यभार ग्रहण किया तो सबसे ज्यादा मामले घरेलू हिंसा, वैवाहिक विवाद, दहेज उत्पीड़न आदि के सामने आ रहे थे, ये ऐसे मामले होते है जो मामूली सी बात पर इतने बढ़ जाते है कि परिवार टूटने के कगार पर पहुंच जाता है, कोर्ट कचहरी के साथ साथ परिवार का सकून, सम्मान, धन ,शांति सबकी हानि होती है। बेटी किसी की घर बैठ जाए तो उसका जीवन भी खुशहाल नहीं रहता। ऐसे मामले को बारीकी से देखा समझा और निस्तारण कराने के लिए महिला सैल प्रभारी बोबेश धीमान और परिवार परामर्श केन्द्र , थानों में बनी महिला हेल्प डेस्क को सक्रियता से कार्य करने के निर्देश दिए..
काउंसलिंग से बदली सूरत
एसएसपी ने बताया कि पुलिस विभाग के सशक्त प्रयास से दोनों पक्षों की काउंसलिंग में तेजी लाई गई और एक माह में 66 ऐसे विवादों का निस्तारण कराकर पति से अलग रह रही पत्नियों को स्वेच्छा से उनके साथ भेजा और उनके परिवारों की खुशियां लौटाने का काम किया। महिला सैल प्रभारी ने बताया कि 5 मामले तो ऐसे सामने आए जिनमें शौहर अपनी बेगम को तलाक देने को आतुर थे, मगर काउंसलिंग के दौरान उनके विवादों का निस्तारण हो सका।