प्रयागराज, 13 जनवरी 2026: प्रयागराज के पवित्र त्रिवेणी संगम पर लगे माघ मेले 2026 में मकर संक्रांति (15 जनवरी) को आस्था का भव्य महासंगम देखने को मिलेगा। मेला प्रशासन ने अनुमान जताया है कि इस पावन दिन दो करोड़ से अधिक श्रद्धालु गंगा-यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम में पवित्र डुबकी लगाएंगे.
यह दूसरा प्रमुख शाही स्नान है, जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश कर उत्तरायण होते हैं, जिसे हजारों यज्ञों के समान पुण्यदायी माना जाता है।माघ मेला 3 जनवरी (पौष पूर्णिमा) से शुरू हो चुका है और 15 फरवरी (महाशिवरात्रि) तक चलेगा। इस दौरान कुल छह प्रमुख स्नान पर्व पड़ेंगे, जिनमें मकर संक्रांति के अलावा मौनी अमावस्या (18 जनवरी) सबसे बड़ी भीड़ वाला दिन रहेगा। पूरे मेले में 12 से 15 करोड़ श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है, जिसमें मकर संक्रांति पर दो करोड़ से अधिक की अपेक्षा की जा रही है.
प्रशासन ने कुंभ मॉडल पर तैयारियां की हैं, जिसमें स्नान घाटों का विस्तार, अस्थायी शहर बसाना और भीड़ प्रबंधन शामिल है। मेला क्षेत्र में करीब 24 स्नान घाट तैयार किए गए हैं, जिनमें अरैल, झूंसी और संगम क्षेत्र शामिल हैं। इनमें पक्का घाट, महाकाल आरती घाट, एरावत घाट, मोरी घाट आदि प्रमुख हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए घाटों का विस्तार कर 9000 फीट तक का अतिरिक्त क्षेत्र बनाया जा रहा है। यातायात प्रबंधन के लिए 10 इमरजेंसी प्लान, रूट डायवर्जन और नो-व्हीकल जोन लागू किए गए हैं.
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम में हजारों पुलिसकर्मी, सीसीटीवी, ड्रोन और मेडिकल कैंप तैनात हैं। रेलवे ने विशेष ट्रेनें चलाई हैं, जबकि विभिन्न राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग घाटों पर व्यवस्था की गई है। मकर संक्रांति पर ब्रह्म मुहूर्त में स्नान का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन तिल-गुड़ का दान और खिचड़ी का प्रसाद पुण्य बढ़ाता है। कल्पवासी भी इस स्नान से अपनी साधना को और गहरा करते हैं। ठंड और कोहरे के बावजूद लाखों श्रद्धालु पहले से ही संगम तट पर डेरा डाल चुके हैं.
यह आयोजन योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत भव्य और सुरक्षित रूप से संचालित हो रहा है। मेला अधिकारी दावा कर रहे हैं कि यह माघ मेला कुंभ जैसी भव्यता वाला होगा, जहां आस्था, परंपरा और आधुनिक सुविधाओं का अनूठा संगम दिखेगा। श्रद्धालुओं से अपील है कि वे समय पर पहुंचें और प्रशासनिक दिशानिर्देशों का पालन करें.