हापुड़ जिले के सिखेड़ा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में स्वास्थ्य विभाग की गंभीर लापरवाही के चलते एक ही दिन में दो नवजात शिशुओं की मौत हो गई. परिजनों का आरोप है कि बिजली गुल होने के कारण स्टाफ ने मोबाइल की टॉर्च की रोशनी में डिलीवरी कराई, वहीं जरूरी मेडिकल सुविधा समय पर न मिलने से दोनों नवजातों ने दम तोड़ दिया.
स्टाफ नर्स ने मोबाइल की रोशनी में कराई डिलीवरी
जानकारी के मुताबिक, कुचेसर चौपला निवासी प्रियंका को प्रसव पीड़ा होने पर सिखेड़ा सीएचसी में भर्ती कराया गया था. रात में महिला की डिलीवरी स्टाफ नर्स ने मोबाइल टॉर्च की रोशनी में कराई, क्योंकि उस वक्त अस्पताल में बिजली नहीं थी और महिला डॉक्टर भी मौजूद नहीं थीं. डिलीवरी के बाद जब नवजात को ऑक्सीजन की सख्त जरूरत थी, तब बिजली न होने के कारण उसे वह सुविधा नहीं मिल सकी. परिजनों का कहना है कि करीब 45 मिनट तक एंबुलेंस भी अस्पताल नहीं पहुंची, जिससे बच्चे की मौत हो गई.
नवजात को नहीं मिल पाई ऑक्सीजन
इसी तरह का मामला सिंभावली की प्रीति के साथ भी सामने आया, जहां दिन के समय हुई डिलीवरी भी टॉर्च की रोशनी में कराई गई. नवजात को समय पर इलाज और ऑक्सीजन नहीं मिल पाने के चलते उसकी भी मौत हो गई.
सीएचसी सिखेड़ा के प्रभारी ने दी सफाई
दोनों मामलों में अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. वहीं सीएचसी सिखेड़ा के प्रभारी डॉ. अमित कुमार बैंसला ने अस्पताल की लापरवाही से इनकार करते हुए कहा कि शिशुओं की मौत डिलीवरी के समय गर्भनाल गले में फंसने की वजह से हुई है. उन्होंने बताया कि मामले की जांच उच्च अधिकारियों द्वारा की जा रही है और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
इस दर्दनाक घटना के बाद परिजनों में भारी आक्रोश है और वो स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं.