लगातार बढ़ते हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम, क्लेम में देरी और अस्पतालों के भारी-भरकम बिलों से परेशान लोगों के लिए राहत की खबर है। मेडिकल इमरजेंसी के समय सबसे ज्यादा जरूरत आसान और तेज मदद की होती है, लेकिन कई बार पॉलिसीधारकों को उलझी प्रक्रिया का सामना करना पड़ता है। अब भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने इन समस्याओं को दूर करने के लिए नई उप-समिति बनाई है। इसका उद्देश्य हेल्थ इंश्योरेंस व्यवस्था को ज्यादा पारदर्शी, सरल और भरोसेमंद बनाना है।
अस्पतालों की मनमानी बिलिंग पर सख्ती
अक्सर शिकायत मिलती रही है कि जैसे ही अस्पताल को पता चलता है कि मरीज के पास हेल्थ इंश्योरेंस है, इलाज का बिल बढ़ जाता है। नई समिति सबसे पहले अस्पतालों की टैरिफ व्यवस्था और बिलिंग पैटर्न की समीक्षा करेगी। एक ही बीमारी के इलाज के लिए अलग-अलग अस्पतालों में खर्च में इतना फर्क क्यों है, इसकी जांच की जाएगी। अगर नई व्यवस्था लागू होती है तो इलाज की कीमतों में तर्कसंगतता आएगी और मरीजों से मनमाने तरीके से वसूली पर रोक लग सकेगी। इससे अस्पताल बिलिंग सिस्टम में एकरूपता आने की उम्मीद है।
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क्लेम सेटलमेंट होगा तेज और आसान
बीमा क्लेम पास होने में देरी, दस्तावेजों की जटिलता और शिकायतों के समाधान में सुस्ती ने ग्राहकों का भरोसा कमजोर किया है। अब नियामक डिजिटल सिस्टम को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। नेशनल हेल्थ क्लेम एक्सचेंज (NHCX) जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए क्लेम प्रक्रिया को तेज और आसान बनाया जाएगा। इसके साथ ही फर्जी दावों पर रोक और प्रशासनिक देरी खत्म करने के लिए भी नए उपाय किए जा रहे हैं। यदि यह मॉडल सफल रहा तो अस्पताल से डिस्चार्ज और भुगतान प्रक्रिया पहले से कहीं आसान हो जाएगी।
प्रीमियम और पॉलिसी पर मिलेगा फायदा
इस पूरी कवायद का सबसे बड़ा मकसद हेल्थ इंश्योरेंस को आम लोगों की पहुंच में लाना है। नियामक ऐसे बेसिक प्रोडक्ट मॉडल पर काम कर रहा है जिसे बिना किसी एजेंट की मदद के भी आसानी से समझा जा सके। साथ ही भविष्य में प्रीमियम अचानक न बढ़े, इसके लिए मेडिकल महंगाई और क्लेम ट्रेंड का विश्लेषण किया जाएगा। अगर ये सुधार लागू होते हैं तो पॉलिसीधारकों को कम झंझट, बेहतर सेवा और ज्यादा भरोसेमंद हेल्थ कवर मिल सकता है।