
हेल्थ इंश्योरेंस वालों के लिए मुसीबत खड़ी हो गई है. 1 सितंबर 2025 से कई बड़े अस्पतालों में कैशलेस सुविधा बंद होने वाली है. एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स ने बीमा कंपनियों के साथ मतभेद के चलते यह फैसला लिया है. इस झगड़े के बीच एक अच्छी खबर भी है. सरकार हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम से 18% GST हटाने पर विचार कर रही है. पीएम नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले से इसकी घोषणा की थी. लेकिन क्या यह जनता के लिए वाकई अच्छी खबर है या सिर्फ दिखावा? आइए समझते हैं.
कैशलेस सुविधा बंद क्यों?
अस्पताल और बीमा कंपनियों के बीच पैसों को लेकर तनातनी चल रही है. अस्पतालों का कहना है कि बीमा कंपनियां समय पर बिलों का भुगतान नहीं करतीं, जिससे उन्हें नुकसान हो रहा है. इसीलिए उन्होंने कैशलेस सुविधा रोकने का फैसला लिया. यानी अब मरीजों को पहले अपनी जेब से अस्पताल का बिल भरना होगा और बाद में बीमा कंपनी से क्लेम लेना होगा. यह खासकर उन लोगों के लिए परेशानी है जो कैशलेस सुविधा पर निर्भर हैं.
GST हटने से क्या बदलेगा?
अभी हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर 18% GST लगता है. मतलब अगर आपका सालाना प्रीमियम 20,000 रुपये है तो 3,600 रुपये टैक्स के तौर पर देने पड़ते हैं. कुल मिलाकर 23,600 रुपये चुकाने पड़ते हैं. अगर सरकार GST हटा देती है, तो आप सिर्फ 20,000 रुपये देंगे. विशेषज्ञों का कहना है कि इससे प्रीमियम की लागत 15% तक कम हो सकती है. इससे ज्यादा लोग हेल्थ इंश्योरेंस लेने के लिए प्रोत्साहित होंगे. नेशनल इंश्योरेंस की सीएमडी राजेश्वरी सिंह मुनि का कहना है कि सस्ता प्रीमियम ज्यादा ग्राहकों को आकर्षित करेगा और लोग अपनी पॉलिसी की राशि भी बढ़ा सकते हैं.
ये भी पढ़ें : Hyderabad का Ganesh लड्डू! आस्था की मिठास, करोड़ों की बोली, परंपरा का उत्सव
कोविड ने सिखाया सबक
कोविड के बाद से हेल्थ इंश्योरेंस की मांग बढ़ी है. करीब 55 करोड़ लोग किसी न किसी हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम के दायरे में हैं, लेकिन 40 करोड़ लोग अभी भी बिना कवरेज के हैं. बढ़ती मेडिकल लागत और महंगाई के चलते मौजूदा बीमा भी पूरी सुरक्षा नहीं दे पा रहा. GST हटने से इंश्योरेंस सस्ता होने की उम्मीद है जिससे और लोग इसे खरीद सकते हैं.
क्या है चुनौती?
GST हटने से सरकार को हर साल 17,000 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो सकता है. कुछ राज्यों को डर है कि इससे उनकी कमाई कम होगी. साथ ही बीमा कंपनियां इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का फायदा खो सकती हैं, जिससे वो प्रीमियम बढ़ा सकती हैं. सितंबर 2025 में GST काउंसिल की बैठक में इस पर अंतिम फैसला होगा. अगर मंजूरी मिली तो दिवाली तक नए नियम लागू हो सकते हैं.