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Placenta Facts : आजकल सोशल मीडिया और कुछ वेलनेस ब्लॉग्स पर एक अनोखा ट्रेंड देखने को मिल रहा है, प्लेसेंटा (Placenta) खाना, जिसे अंग्रेज़ी में placentophagy कहा जाता है. यह चलन खासतौर पर नई माताओं के बीच लोकप्रिय हो रहा है. कुछ लोग इसे स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक लाभकारी मानते हैं और दावा करते हैं कि इससे शरीर को ताकत मिलती है, डिप्रेशन से राहत मिलती है और प्रसव के बाद रिकवरी जल्दी होती है. लेकिन सवाल यह है, क्या वाकई में यह ट्रेंड वैज्ञानिक रूप से सही है या यह सिर्फ एक भ्रम है? आइए जानते हैं इसके पीछे की सोच, संभावित फायदे और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव.
प्लेसेंटा क्या है और लोग इसे क्यों खा रहे हैं?
प्लेसेंटा वह अंग होता है जो गर्भावस्था के दौरान माँ और बच्चे को आपस में जोड़ता है। यह शिशु को पोषण, ऑक्सीजन और सुरक्षा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. जन्म के बाद जब इसकी भूमिका समाप्त हो जाती है, तो इसे आमतौर पर शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है। लेकिन हाल के वर्षों में, कुछ महिलाओं ने इसे सुखाकर, कैप्सूल बनवाकर या कच्चे रूप में सेवन करना शुरू किया है. इस ट्रेंड के पीछे मान्यता है कि प्लेसेंटा में हार्मोन, आयरन, प्रोटीन और अन्य पोषक तत्व होते हैं, जो प्रसव के बाद माँ की शारीरिक और मानसिक रिकवरी में सहायक हो सकते हैं. कई लोग यह भी मानते हैं कि इससे पोस्टपार्टम डिप्रेशन में कमी आ सकती है और दूध उत्पादन बढ़ सकता है.
क्या सच में मिलते हैं फायदे?
कुछ महिलाएं अपने अनुभव के आधार पर बताती हैं कि प्लेसेंटा खाने के बाद उन्हें ऊर्जा में सुधार, मूड बेहतर होने और कम थकान महसूस हुई. लेकिन जब इस विषय पर वैज्ञानिक रिसर्च देखी जाती है, तो आज तक कोई ठोस और व्यापक वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिलते जो यह पुष्टि करें कि प्लेसेंटा खाना वास्तव में स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है. वास्तव में, American College of Obstetricians and Gynecologists (ACOG) जैसे मेडिकल संगठनों ने प्लेसेंटा खाने के समर्थन में कोई सिफारिश नहीं की है क्योंकि इसके फायदे स्पष्ट और सिद्ध नहीं हैं.
प्लेसेंटा खाने के संभावित नुक़सान
हालाँकि यह ट्रेंड सुनने में "प्राकृतिक" और "ऑर्गेनिक" लगता है, लेकिन इसके कई स्वास्थ्य जोखिम भी हैं, जिन पर ध्यान देना जरूरी है:
1. संक्रमण का खतरा: प्लेसेंटा शरीर का अंग है और इसमें बैक्टीरिया, वायरस या खून के संक्रमण मौजूद हो सकते हैं। अगर इसे सही तरीके से स्टोर या प्रोसेस नहीं किया गया, तो इससे संक्रमण फैल सकता है.
2. अनियंत्रित हार्मोन स्तर: प्लेसेंटा में पाए जाने वाले हार्मोन शरीर के हार्मोन संतुलन को बिगाड़ सकते हैं, जिससे सिरदर्द, चिड़चिड़ापन या अन्य हार्मोनल समस्याएं हो सकती हैं.
3. कैप्सूल का अनियमित निर्माण: कई बार प्लेसेंटा को कैप्सूल बनाने वाले प्रोफेशनल नहीं होते, जिससे सफाई और सुरक्षा मानकों की कमी हो सकती है। इससे नुकसान का खतरा बढ़ जाता है.
4. मनोवैज्ञानिक प्रभाव: प्लेसेंटा खाना कुछ लोगों के लिए मानसिक रूप से असहज करने वाला अनुभव हो सकता है। इससे उल्टी, घबराहट या गिल्ट जैसी भावनाएँ पैदा हो सकती हैं.
5. शिशु को नुकसान का जोखिम: कुछ केस स्टडीज़ में यह भी पाया गया कि प्लेसेंटा कैप्सूल में बैक्टीरिया मौजूद था, जिससे माँ के दूध के ज़रिए शिशु को भी संक्रमण हो गया.
सोच-समझकर लें निर्णय
प्लेसेंटा खाने का ट्रेंड भले ही आजकल आकर्षक लग रहा हो और कुछ सेलेब्रिटीज़ द्वारा प्रमोट भी किया जा रहा हो, लेकिन विज्ञान और चिकित्सा की दृष्टि से इसके लाभ प्रमाणित नहीं हैं। इसके उलट, संक्रमण और अन्य स्वास्थ्य जोखिमों की संभावना अधिक है। यदि कोई महिला यह विकल्प अपनाना चाहती है, तो किसी योग्य डॉक्टर या स्त्रीरोग विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहद जरूरी है. स्वास्थ्य के लिए कई अन्य सुरक्षित और प्रभावी तरीके मौजूद हैं — जैसे पौष्टिक आहार, पर्याप्त नींद, सहारा देने वाला सामाजिक वातावरण और सही मेडिकल मार्गदर्शन। ये सभी विकल्प बिना जोखिम के बेहतर रिकवरी में मदद करते हैं.