देश में गर्मियां आ चुकी हैं और अभी के हालातों को देखते हुए संभावना है कि आगे-आगे तापमान बहुत तेजी से बढ़ेगा। ऐसे में झुलसाने वाली गर्म हवाओं से बचने के लिए अब एसी की ठंडी हवा ही सुकून देने का काम करेगी। पर एसी की ये ठंडी हवा जो हमें आराम देती है वही हमारी सांसो के लिए बहुत बड़ा खतरा बन गई हैं। एसी से मिलने वाली ये ठंडी हवा हमारे सांस की नली को सुखा रही है जिससे जान पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।
सांसों के लिए बड़ा खतरा
एसी की ठंडी हवा जो हमें राहत देती है वही हमारी सांसों पर खतरा बन रही है। एसी कमरे की नमी सोखता है जिससे कमरा ठंडा होने लगता है। पर एसी सिर्फ कमरे में मौजूद नमी ही नहीं बल्कि हमारे शरीर में मौजूद पानी को भी सोखता है। साथ ही जब हम इस सूखी हवा में सांस लेते हैं तो हमारे नाक और गले की मेंम्ब्रेन भी सूखने लगती है। यह हमारे शरीर की इम्यूनिटी को कमजोर कर देता है जिससे शरीर पर बीमारियों का असर जल्दी पड़ने लगता है। इससे साइनस इन्फेक्शन (साइनोसाइटिस) जैसी बीमारी का खतरा भी बढ़ जाता है।
फेफडों पर सीधा असर
एसी से निकलने वाली ठंडी हवा हमारे म्यूकस को सुखा देती है। म्यूकस के सूखने से हमारा शरीर बीमारियों से बचने की क्षमता खो देता है जिससे हमें सर्दी, जुखाम, गले में खराश, साइनस जैसी बीमारी जल्दी प्रभावित करने लगती हैं। इससे सांस लेने में गंभीर परेशानी का सामना भी करना पड़ सकता है। खराब वेंटीलेशन और एसी में ज्यादा देर तक रहने से हमारे फेफड़ो पर सीधा असर पड़ता है जिससे फेफड़ों की कार्यक्षमता कम हो जाती है।
शरीर पर पड़ते हैं ये बुरे असर
1. एसी में ज्यादा वक्त बिताने से 'सिकल बिल्डिंग सिंड्रोम' का सामना करना पड़ सकता है। इसमें शरीर में भारीपन और सिरदर्द बढ़ने लगता है जिससे थकान और सुस्ती ज्यादा महसूस होने लगती है।
ऐसा इसलिए होता है क्योंकि जब हम कमरा बंद कर देते हैं तो उसमें ताजी हवा नहीं आ पाती। हवा का सर्कुलेशन सुचारु ना होने के कारण कमरे में ऑक्सीजन लेवल कम हो जाता है और कार्बन डाइऑक्साइड का लेवल बढ़ जाता है जिसका सीधा असर हमारे शरीर और दिमाग पर पड़ता है।
2. अस्थमा या ब्रोंकाइटिस से जूझ रहे मरीज़ों के लिए एसी में ज्यादा देर तक रहना उनकी स्थिति को और भी गंभीर बना सकता है।
3. ज्यादा देर तक एसी की ठंडी हवा में रहने से सांस की नलियों में सिकुड़न होने लगती है जिसे 'ब्रोंकोस्पैस्म' कहते हैं।
4. एसी में जमी फफूंद और धूल फेफड़ो तक जाकर इन्फेक्शन, एलर्जी, और अटैक का कारण भी बन सकती है।
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ऐसे करें बचाव
1. एसी का तापमान हमेशा 24°C से 26°C के बीच में ही रखें। इससे शरीर का मेटाबॉलिज्म मेंटेन रहेगा।
2. कभी भी एसी का तापमान 16°C या 18°C से कम ना रखें वर्ना शरीर के मेटाबॉलिज्म पर बुरा असर पड़ सकता है।
3. घर या ऑफिस में वेंटीलेशन पर खास ध्यान दें और ताजी हवा के लिए सभी खिड़कियों और गेट को कम से कम दिन में दो से तीन बार खोलें।
4. सूरज की रोशनी से बैक्टीरिया खत्म होते हैं इसलिए ताजी हवा के साथ धूप को भी घर में आने दें।
5. एसी शरीर और कमरे में मौजूद नमी को सोखता है। इसलिए याद रखें कि जिस कमरे में एसी चल रहा है उसमें पानी का लोटा या बाल्टी भरकर रखें ताकि आपके शरीर की नमी एसी ना सोखे।
6. ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं ताकि आपका शरीर हाइड्रेटिड रहे।
7. गंदे फिल्टर से धूल और फफूंद निकलती है जो फेफड़ों पर बुरा इन्फेक्शन डालती है। इसलिए एसी के फिल्टर को नियमित रुप से हर 15 दिन में साफ करते रहें ताकि गंदे फिल्टर की वजह से होने वाले इन्फेक्शन से बचा जा सके।
8. कहीं बाहर जाने के 10-15 मिनट पहले एसी बंद करके शरीर को नॉर्मल टेम्परेचर पर आने दें। इससे शरीर का तापमान बाहर के वातावरण के लेवल में आ जाएगा जिससे आप बीमार होने से बचेंगे।
9. एसी से निकलकर तुरंत धूप में ना जाएं।