Healthy Snacking Trends in India : शाम की चाय के साथ कुछ कुरकुरा खाने का मन हो तो पहले हाथ अक्सर चिप्स, बिस्कुट या नमकीन के पैकेट पर जाता था। लेकिन अब तस्वीर धीरे-धीरे बदल रही है। लोग स्वाद के साथ अपनी सेहत का भी ध्यान रखने लगे हैं और इसी वजह से मखाना, बादाम, अखरोट, कद्दू के बीज और दूसरे मेवे रोजमर्रा के नाश्ते में अपनी जगह बना रहे हैं। हाल की एक रिपोर्ट में भी भारत में मखाना और मेवों जैसे विकल्पों की बढ़ती पसंद को बदलती खान-पान की आदतों से जोड़ा गया है।
चिप्स की जगह मखाना क्यों पसंद आ रहा है?
मखाना कोई नया खाना नहीं है। भारत में इसे लंबे समय से खाया जाता रहा है, खासकर व्रत के दौरान। लेकिन अब यही पारंपरिक चीज आधुनिक नाश्ते का हिस्सा बन रही है। इसे हल्का भूनकर मसालों के साथ खाया जा सकता है और बाजार में इसके कई स्वाद वाले विकल्प भी मिलने लगे हैं। मखाने में प्रोटीन, फाइबर और कई खनिज पाए जाते हैं। यही वजह है कि जो लोग रोजाना के नाश्ते में कुछ हल्का और पौष्टिक विकल्प चाहते हैं, उन्हें यह पसंद आ रहा है। हालांकि इसे कितना खाना है, यह भी जरूरी है। ज्यादा नमक, तेल या मसाले वाला पैकेट हर बार बेहतर विकल्प नहीं माना जा सकता।
मेवों ने भी बनाई रोज की जगह
बादाम और अखरोट जैसे मेवे अब केवल त्योहारों या खास मौकों तक सीमित नहीं हैं। कई लोग इन्हें सुबह के नाश्ते, काम के बीच या शाम की भूख में खाते हैं। कद्दू के बीज, सूरजमुखी के बीज और दूसरे बीजों के मिश्रण भी लोगों की पसंद में शामिल हो रहे हैं। इस बदलाव के पीछे एक बड़ी वजह प्रोटीन और साफ सामग्री को लेकर बढ़ती जागरूकता है। 2026 की एक स्वस्थ नाश्ते से जुड़ी रिपोर्ट के मुताबिक, 86 प्रतिशत लोगों ने नाश्ता चुनते समय प्रोटीन को महत्वपूर्ण माना, जबकि 62 प्रतिशत लोगों ने सामग्री की साफ जानकारी को प्राथमिकता दी।
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सिर्फ स्वाद नहीं, अब लेबल भी देख रहे लोग
आज का ग्राहक केवल यह नहीं देख रहा कि कोई नाश्ता स्वादिष्ट है या नहीं। पैकेट खरीदते समय लोग नमक, चीनी, तेल और सामग्री की सूची पर भी ध्यान दे रहे हैं। यानी नाश्ते की आदत में धीरे-धीरे एक सोच वाला बदलाव दिखाई दे रहा है। मखाना और मेवों की बढ़ती मांग का असर बाजार से लेकर किसानों तक दिखाई दे रहा है। सरकार के अनुसार भारत दुनिया में मखाने का सबसे बड़ा उत्पादक है और बिहार देश के उत्पादन में करीब तीन-चौथाई योगदान देता है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि चिप्स या नमकीन पूरी तरह लोगों की थाली से गायब हो गए हैं। असली बदलाव यह है कि अब उनके साथ मखाना, मेवे और बीज जैसे विकल्प भी रोजमर्रा के नाश्ते में जगह बना रहे हैं। यानी भारतीयों की नाश्ते की प्लेट में स्वाद के साथ सेहत को भी धीरे-धीरे बराबर महत्व मिल रहा है।