उत्तरी जापान में भीषण बर्फबारी ने कहर बरपा रखा है, जिसमें अब तक 35 लोगों की मौत हो गई है और 358 लोग घायल हुए हैं। सबसे ज्यादा प्रभावित निगाता प्रीफेक्चर है, जहां 12 लोगों की मौत हुई है। बर्फबारी के कारण कई शहरों में हालात आपातकालीन हो गए हैं, और सड़कों, घरों और पहाड़ों पर बर्फ की मोटी परत जम गई है ।
सेल्फ-डिफेंस फोर्सेस को बर्फ हटाने में लगी
जापान की अग्नि एवं आपदा प्रबंधन एजेंसी ने बताया है कि अधिकांश मौतें बर्फ हटाने के काम के दौरान हुई हैं, जिनमें छत से गिरकर मरने वाले भी शामिल हैं। सरकार ने राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए हैं, और सेल्फ-डिफेंस फोर्सेस को बर्फ हटाने और फंसे लोगों को बचाने के लिए तैनात किया गया है।
जापान में बर्फबारी के कारण मुख्य रूप से साइबेरिया से आने वाली ठंडी हवाएं और जापान सागर की गर्मी हैं। जब ठंडी हवा जापान सागर के ऊपर से गुजरती है, तो वह गर्मी और नमी को अवशोषित करती है, जिससे बर्फबारी होती है। यह प्रक्रिया जापान के उत्तरी हिस्सों में अधिक होती है, जैसे कि निगाता, अकिता और अओमोरी।
बर्फबारी के कारण:
- साइबेरिया से आने वाली ठंडी हवाएं जापान सागर के ऊपर से गुजरती हैं और गर्मी और नमी को अवशोषित करती हैं।
- जापान सागर की गर्मी ठंडी हवा को गर्म करती है, जिससे बर्फबारी होती है।
- जापान के पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी अधिक होती है, क्योंकि हवा को ऊपर की ओर उठना पड़ता है, जिससे बर्फबारी होती है।
जापान में बर्फबारी का असर
1. बर्फबारी के कारण सड़कें बंद हो जाती हैं, जिससे यातायात प्रभावित होता है। कई शहरों में बसें और ट्रेनें बंद हो जाती हैं।
2. बर्फबारी के कारण कई हवाई अड्डों पर विमान सेवाएं बंद हो जाती हैं, जिससे यात्रियों को परेशानी होती है।
3. बर्फबारी के कारण बिजली के तार टूट जाते हैं, जिससे बिजली कटौती होती है।
4. कृषि और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव: बर्फबारी के कारण कृषि उत्पादन प्रभावित होता है, जिससे अर्थव्यवस्था पर भी प्रभाव पड़ता है।
5. बर्फबारी के कारण कई लोग घायल हो जाते हैं और कुछ लोगों की मौत भी हो जाती है। घरों और इंगठनों को भी नुकसान पहुंचता है।