
दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों में कमजोर आर्थिक स्थिति वाले ईडब्ल्यूएस बच्चों को स्कूल से ‘व्यवस्थित बहिष्करण’करने के आरोप लगाने वाली याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने नोटिस जारी किया है। हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार, सीबीएसई और एनसीआरटी को नोटिस जारी करके चार सप्ताह में जवाब मांगा है। इस मामले में अगली सुनवाई 12 नवंबर को होनी है।
मंहगी किताबों के लिए मजबूर किया जा रहा
याचिका में आरोप लगा है कि निजी स्कूलों में EWS कैटेगरी के बच्चों को निजी प्रकाशकों की मंहगी किताबें और स्कूल मैटेरियल खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है। दून स्कूल के डायरेक्टर जसमीत सिंह साहनी की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि दिल्ली के निजी स्कूलों में शिक्षा के अधिकार कानून के तहत जिन कमजोर आर्थिक स्थिति और वंचित तबके के बच्चों को दाखिला दिया गया है। उनके अभिभावकों को स्कूलों की ओर से सालाना 10-12 हजार रुपये की निजी प्रकाशकों की पुस्तकें खरीदने को मजबूर किया गया है।
स्कूली बैग का वजन कम होना चाहिए
याचिका के तहत 2016-17 में सीबीएसई की ओर जारी सर्कुलर के तहत पढाई के लिए मात्र NCERT की किताबों का ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए। मगर प्राइवेट स्कूल निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें खरीदने को मजबूर हो रहे हैं। NCERT की किताबों के दाम जहां 700 रुपये सालाना है, वही प्राइवेट पब्लिशर की पुस्तकों की लागत करीब 10 हजार रुपये सालाना पड़ती है। याचिकाकर्ता के तहत 2020 में जारी स्कूल बैग पॉलिसी के तहत किसी बच्चे के स्कूली बैग का वजन उसके कुल वजन से 10 फीसदी से अधिक नहीं होना चाहिए। मगर आज स्कूली बच्चों को छह से आठ किलो का वजन उठाना पड़ रहा है।