Bulldozer Action : पश्चिम बंगाल के पूरबा मेदिनीपुर जिले में वर्ष 2024 में सरकारी जमीन की सीमाओं को लेकर सर्वे अभियान चलाया गया था। इसी दौरान प्रशासन ने दो इमारतों को अवैध निर्माण बताते हुए बुलडोजर कार्रवाई की। हालांकि प्रभावित परिवारों का आरोप था कि अधिकारियों ने निर्धारित सीमा से आगे बढ़कर उनकी संपत्ति को भी नुकसान पहुंचा दिया, जिसके बाद मामला अदालत पहुंचा।
पीड़ितों ने कोर्ट में दी चुनौती
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि प्रशासन को जितनी कार्रवाई करनी थी, उससे कहीं अधिक हिस्सा तोड़ दिया गया। उनका आरोप था कि अतिक्रमण हटाने के नाम पर वैध संपत्ति को भी नुकसान पहुंचाया गया। दूसरी ओर राज्य सरकार ने अदालत में दावा किया कि ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं है जिससे साबित हो कि कार्रवाई तय सीमा से आगे बढ़ी थी।
हाई कोर्ट ने रिकॉर्ड देखकर सुनाया फैसला
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति पार्थ सारथी सेन ने उपलब्ध दस्तावेजों और रिकॉर्ड का परीक्षण किया। अदालत ने पाया कि कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने कानूनी सीमाओं का पालन नहीं किया और याचिकाकर्ताओं की संपत्ति को अनावश्यक नुकसान पहुंचाया गया। कोर्ट ने इसे नागरिक अधिकारों के खिलाफ माना और प्रशासनिक कार्रवाई पर गंभीर टिप्पणी की।
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पीड़ित परिवारों को मिलेगा 10 लाख रुपये हर्जाना
अदालत ने प्रभावित परिवारों को 10 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह राशि दो किस्तों में दी जाएगी। पहली किस्त के रूप में 5 लाख रुपये अक्टूबर 2026 तक और दूसरी 5 लाख रुपये फरवरी 2027 तक देने होंगे। कोर्ट ने माना कि गलत कार्रवाई की वजह से लोगों को आर्थिक और मानसिक नुकसान झेलना पड़ा है।
दो साल में दोबारा बनानी होगी इमारत
हाई कोर्ट ने केवल मुआवजे तक ही मामला सीमित नहीं रखा। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रभावित इमारतों का पुनर्निर्माण कराया जाए। आदेश के अनुसार दो वर्षों के भीतर नई इमारतें तैयार कर पीड़ितों को सौंपनी होंगी। यह निर्देश प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से दिया गया है।
बुलडोजर कार्रवाई पर फिर शुरू हुई बहस
इस फैसले के बाद बुलडोजर कार्रवाई और उसकी कानूनी सीमाओं को लेकर नई बहस छिड़ गई है। अदालत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कानून के दायरे में रहकर ही की जानी चाहिए। यदि अधिकारियों की ओर से सीमा से अधिक कार्रवाई की जाती है और किसी नागरिक को नुकसान पहुंचता है, तो उसके लिए प्रशासन को जवाबदेह ठहराया जा सकता है।