High Court Raises Questions: कर्नाटक हाईकोर्ट ने बेंगलुरु के डॉक्टर और सामाजिक कार्यकर्ता नागेंद्रप्पा टी. के खिलाफ दर्ज एफआईआर की जांच पर अंतरिम रोक लगा दी है। डॉक्टर ने कथित अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की जानकारी पुलिस को दी थी। अदालत ने प्रथम दृष्टया पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे जवाबी कार्रवाई जैसा बताया और मामले से जुड़े रिकॉर्ड तलब किए हैं। साथ ही, अदालत ने कहा कि अवैध प्रवासियों से जुड़े मामलों में कानून के अनुसार कार्रवाई होना जरूरी है।
पुलिस की कार्रवाई पर हाईकोर्ट ने उठाए सवाल
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पूछा कि जिस व्यक्ति ने पुलिस को कथित अवैध प्रवासियों की जानकारी दी, उसी के खिलाफ इतनी जल्द आपराधिक मामला कैसे दर्ज कर दिया गया। अदालत के सामने यह भी बताया गया कि जांच अधिकारी ने पहले संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई के लिए एफआरआरओ (FRRO) को पत्र भेजा और कुछ ही मिनट बाद उसी व्यक्ति की शिकायत पर डॉक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई। कोर्ट ने इस घटनाक्रम पर सवाल उठाते हुए विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
मारपीट के आरोपों पर भी जताई शंका
हाईकोर्ट ने कहा कि शिकायत में लगाए गए मारपीट के आरोपों के समर्थन में कोई मेडिकल रिकॉर्ड या चोट के स्पष्ट प्रमाण प्रस्तुत नहीं किए गए। इसके बावजूद पुलिस द्वारा तत्काल एफआईआर दर्ज किए जाने पर अदालत ने नाराजगी व्यक्त की। कोर्ट ने कहा कि जांच निष्पक्ष और तथ्यों के आधार पर होनी चाहिए तथा किसी भी पक्ष के साथ जल्दबाजी में कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।
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अवैध प्रवासियों के मुद्दे पर अदालत की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि यदि अवैध प्रवासियों के मामलों में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया तो यह गंभीर चिंता का विषय हो सकता है। न्यायालय ने यह भी कहा कि संबंधित एजेंसियों को अपनी जिम्मेदारियां नियमों के अनुसार निभानी चाहिए। अदालत ने एफआरआरओ को भी मामले में पक्षकार बनाने का निर्देश दिया और कथित अवैध प्रवासियों की वर्तमान स्थिति पर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा।
6 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि संबंधित विदेशी नागरिकों को एफआरआरओ के समक्ष पेश किया जा चुका है और उन्हें अस्थायी डिटेंशन सेंटर में रखा गया है। सरकार ने मामले से जुड़े दस्तावेज पेश करने के लिए समय भी मांगा। हाईकोर्ट ने डॉक्टर नागेंद्रप्पा टी. के खिलाफ दर्ज मामलों की आगे की जांच पर फिलहाल रोक बरकरार रखते हुए अगली सुनवाई 6 अगस्त निर्धारित की है। मामले में अब अदालत पुलिस और संबंधित एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर आगे की सुनवाई करेगी।