Neha Bora bail plea Tomorrow: दिल्ली हाईकोर्ट ने AISA अध्यक्ष नेहा बोरा के निजी मुचलके से जुड़े मामले में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, अदालत इस मामले में अगले दिन आदेश सुनाएगी। सुनवाई के दौरान नेहा की छवि, उनके खिलाफ दर्ज छह एफआईआर और शांति बनाए रखने के लिए निजी मुचलका भरने की शर्त पर चर्चा हुई। अदालत ने यह सवाल भी उठाया कि किसी व्यक्ति से अच्छे व्यवहार का वादा मांगने का उसकी छवि और संवैधानिक अधिकारों पर क्या असर पड़ सकता है।
‘बैड बॉय’ की छवि पर अदालत ने उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत ने टिप्पणी की कि नेहा को पहले ही ‘बैड बॉय’ की तरह पेश कर दिया गया है और अब उनसे अच्छे व्यवहार का वादा करने को कहा जा रहा है। बेंच ने इस कार्रवाई के व्यक्ति की छवि पर पड़ने वाले प्रभाव का उल्लेख करते हुए संविधान के अनुच्छेद 21 से जुड़े पहलुओं पर भी सवाल उठाए। अनुच्छेद 21 जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के संरक्षण से संबंधित है। अदालत ने इस मामले में दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार किया।
सरकार ने छह एफआईआर का दिया हवाला
सरकार की ओर से पेश एएसजी चेतन शर्मा ने दलील दी कि विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) ने नोटिस जारी करने से पहले उपलब्ध तथ्यों पर विचार किया था। उनके मुताबिक, जनरल डायरी की प्रविष्टियों, पहले दर्ज एफआईआर, अपराध संबंधी रिकॉर्ड और उस समय सड़कों पर बने हालात को ध्यान में रखा गया था। उन्होंने यह भी कहा कि मजिस्ट्रेट ने जांच अधिकारी को बुलाकर मामले की जानकारी ली थी। चेतन शर्मा ने नेहा के खिलाफ दर्ज छह एफआईआर का हवाला देते हुए उनके आचरण को लेकर सवाल उठाए।
‘रिजीम चेंज’ वाली बैठक का भी जिक्र
सुनवाई में सरकार की ओर से दावा किया गया कि नेहा बोरा ने कुछ नेताओं और प्रशांत भूषण के साथ एक संयुक्त बैठक में हिस्सा लिया था, जहां कथित तौर पर ‘रिजीम चेंज’ यानी सत्ता परिवर्तन की बात कही गई थी। एएसजी चेतन शर्मा ने इस बैठक का उल्लेख करते हुए कार्रवाई को आधारहीन बताए जाने पर आपत्ति जताई। हालांकि, बैठक को लेकर सरकार की ओर से रखे गए दावे और उसके संदर्भ पर अदालत में दलीलें दी गईं।
निजी मुचलके की शर्त को नेहा ने दी चुनौती
नेहा बोरा के वकील गोपाल शंकरनारायणन ने दलील दी कि लोकतंत्र में सत्ता परिवर्तन की बात करना अपने आप में गलत नहीं है। उनके अनुसार, नेहा ने केवल मंडी हाउस में लोगों से जुटने की अपील की थी और हिंसा या कानून तोड़ने का आह्वान नहीं किया था। चुनौती दिए गए नोटिस में शांति बनाए रखने के लिए 10 हजार रुपये का निजी मुचलका और एक जमानतदार देने को कहा गया है। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब मामले में अदालत के आदेश का इंतजार है।