असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा बड़ी कवायद में लगे हुए हैं। वे रविवार को लंदन पहुंचे। यहां पर वे सदियों पुराने ऐतिहासिक ‘ब्रिंदाबनी वस्त्र’ को भारत वापस लाने के प्रयास में जुटे हुए हैं। इस प्रक्रिया को अंतिम रूप देने को लेकर उच्च-स्तरीय बैठक हुई।
16वीं शताब्दी की एक दुर्लभ हस्तनिर्मित
ब्रिंदाबनी वस्त्र 16वीं शताब्दी की एक दुर्लभ हस्तनिर्मित वस्त्रकला बताई जाती है। इसका निर्माण महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव और उनके शिष्य माधवदेव के निर्देशन पर हुआ। इसमें भगवान कृष्ण के बाल रूप से जुड़े प्रसंगों को सामने रखा गया है। इसमें बारीकी से बुने गए पैनलों के माध्यम से दर्शाने का प्रयास किया गया है। यह एक मध्यकालीन असमिया शिल्प और भक्तिपरक कला का अनमोल उदाहरण की तरह देखा जाता है।
वस्त्र के विभिन्न हिस्से असम से बाहर ले जाए गए
ब्रिटिश काल के दौरान इस वस्त्र के विभिन्न हिस्से असम से बाहर गए थे। ये बाद में लंदन और पेरिस के संग्रहालयों में संरक्षित हुए। मुख्यमंत्री सरमा ने साथ आए अधिकारियों के अनुसार, ब्रिटेन के संबंधित प्राधिकारियों के साथ शुरूआती दौर की बातचीत काफी सकारात्मक बताई जा रही है। ऐसी चर्चाएं हैं कि वस्त्र को गुवाहाटी लाने की रूपरेखा तैयार हो रही है। आगे की प्रक्रिया पर सहमति बन रही है।
आधुनिक संरक्षण तकनीकों से लैस होगी,
सीएम सरमा ने पुष्टि की कि राज्य सरकार ने गुवाहाटी में एक अत्याधुनिक संग्रहालय का निर्माण करने को लेकर भूमि आवंटित की है। यहां पर ब्रिंदाबनी वस्त्र को स्थायी रूप से प्रदर्शित करने की रूपरेखा तैयार होगी। यह सुविधा आधुनिक संरक्षण तकनीकों से लैस होने वाली है। इस तरह से नाजुक कला विरासत की दीर्घकालिक सुरक्षा संभव हो सकेगी।