पितृपक्ष के पावन समय में लोग अपने पितरों की आत्मा की शांति व मोक्ष की कामना से गयाजी में पिंडदान करने के लिए पहुंचते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मध्य प्रदेश के उज्जैन में भी ऐसा पवित्र तीर्थ स्थल मौजूद है, जहाँ पिंडदान व तर्पण करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि यहां भगवान श्रीकृष्ण ने गुप्त रूप से फाल्गु नदी को प्रकट किया था। जानिए उज्जैन के इस विशेष गयाकोठा तीर्थ के बारे में।
उज्जैन का गुप्त फाल्गु नदी का महत्व
उज्जैन के प्रसिद्ध गयाकोठा तीर्थ की खासियत यह है कि मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने अपने गुरु महर्षि सांदीपनि के मृत पुत्रों को मोक्ष दिलाने के लिए इस तीर्थ का निर्माण किया था। पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान कृष्ण ने यहीं पर गुप्त रूप से फाल्गु नदी का प्रवाह प्रकट किया था। इस पवित्र जल से तर्पण करने से पितृमोक्ष की प्राप्ति मानी जाती है।
अनुष्ठान और विधि
गयाकोठा तीर्थ पर भगवान विष्णु के 16 चरण बने हुए हैं, जिन पर श्रद्धालु दूध, जल, तिल और फूल अर्पित करते हैं। पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध जैसे कर्मकांड विधिपूर्वक सम्पन्न किए जाते हैं। यहाँ किए गए अनुष्ठान को अत्यंत पवित्र माना जाता है। विशेष रूप से यह माना जाता है कि इस तीर्थ पर किए गए पिंडदान से पितृऋण समाप्त होता है और परिवार में सुख-समृद्धि आती है।
धार्मिक व ऐतिहासिक महत्व
गयाकोठा तीर्थ का धार्मिक महत्व बहुत प्राचीन है। यह स्थान 84 महादेवों में से 28वें जटेश्वर महादेव का निवास स्थान भी है। सप्तऋषि व गयाधर की विशेष पूजा-अर्चना भी यहाँ होती है। इस वजह से इसे गया जी से तुलनीय माना जाता है। पितृपक्ष के दौरान उज्जैन का यह तीर्थ हजारों श्रद्धालुओं का प्रमुख आकर्षण बन जाता है।