Lynched in Bangladesh: बांग्लादेश में छात्र नेता उस्मान हादी की मौत के बाद भड़की हिंसा ने एक बार फिर मानवता को शर्मसार कर दिया है। 20 दिसंबर को हुई इस हिंसा के दौरान मायमनसिंह जिले के वालुका उपजिला में एक हिंदू व्यक्ति दीपू चंद्र दास की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। आरोप लगाया गया कि दीपू पर ईशनिंदा का शक था, जिसके बाद उग्र भीड़ ने कानून अपने हाथ में ले लिया। इस घटना ने न सिर्फ बांग्लादेश बल्कि पूरे क्षेत्र में सांप्रदायिक तनाव को हवा दे दी है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसकी तीखी आलोचना हो रही है।
इस्लाम इसकी इजाजत नहीं देता
इस जघन्य हत्या पर जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने कड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं पूरे मुस्लिम समाज को शर्मसार करती हैं। मदनी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी सभ्य समाज में किसी व्यक्ति को सजा देने का अधिकार भीड़ को नहीं हो सकता। चाहे आरोप कितने भी गंभीर क्यों न हों, न्याय की एक तय प्रक्रिया होती है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर अपराध करने वाला मुसलमान हो और पीड़ित गैर-मुस्लिम, तो यह अपराध और ज्यादा गंभीर हो जाता है। मदनी ने जोर देकर कहा कि इस्लाम किसी भी तरह की हिंसा, हत्या या अपमान की इजाजत नहीं देता।
गिरफ्तारी हुई, जांच जारी
घटना के बाद बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने इस हत्या की निंदा करते हुए दोषियों को सख्त सजा दिलाने का भरोसा दिया है। दीपू चंद्र दास की हत्या के मामले में अब तक कुल 10 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। रैपिड एक्शन बटालियन ने सात संदिग्धों को पकड़ा है, जबकि पुलिस ने तीन अन्य आरोपियों को हिरासत में लिया है। सरकार का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि उग्रवाद और भीड़ हिंसा पर लगाम लगाने के लिए ठोस कदम कब उठाए जाएंगे।