मध्यप्रदेश के इंदौर से 55 किलोमीटर दूर गौतमपुरा में दीपावली के दूसरे दिन यानि आज ‘धूप पड़वा’ पर फिर से आकाश अग्निबाणों से जगमगाएगा। यहां सदियों पुरानी परंपरा के तहत कलंगी और तुर्रा दल के बीच हिंगोट युद्ध लड़ा जाएगा। यह अनोखी परंपरा युद्ध नहीं, बल्कि आपसी भाईचारे का प्रतीक मानी जाती है। करीब 15 से 20 हजार लोग इस दृश्य के साक्षी बनेंगे, जबकि प्रशासन ने सुरक्षा व व्यवस्था की पूरी तैयारी कर ली है।
सदियों पुरानी परंपरा का अद्भुत दृश्य
हिंगोट युद्ध की परंपरा 300 साल से भी पुरानी मानी जाती है। यह युद्ध दीपावली के दूसरे दिन धूप पड़वा पर आयोजित होता है। इस दिन कलंगी और तुर्रा दल के योद्धा एक-दूसरे पर हिंगोट नामक अग्निबाण फेंकते हैं। लकड़ी के बने इन अग्निबाणों में ज्वलनशील पदार्थ भरे जाते हैं जो जलने पर आकाश में रोशनी और धमक पैदा करते हैं। देखने वाले इस अनोखी परंपरा को दिवाली के बाद की दिव्य रोशनी मानते हैं।
न कोई आयोजक, न प्रायोजक – फिर भी व्यवस्था पूरी
इस आयोजन की सबसे खास बात यह है कि इसका कोई औपचारिक आयोजक या प्रायोजक नहीं होता। इसके बावजूद प्रशासन हर साल सुरक्षा व्यवस्था में कोई कमी नहीं छोड़ता। इस बार भी करीब 200 से अधिक पुलिसकर्मी, 3-4 एंबुलेंस, 50 से ज्यादा स्वास्थ्यकर्मी, डॉक्टर, फायर ब्रिगेड और नगर पालिका की टीम मैदान में मौजूद रहेगी।
मंदिर दर्शन के बाद युद्धभूमि में उतरते हैं योद्धा
परंपरा के अनुसार योद्धाओं को पहले घरों में ढाल को तिलक कर और आरती उतारकर विदा किया जाता है। इसके बाद वे गौतमपुरा स्थित देवनारायण मंदिर में दर्शन कर युद्धभूमि की ओर बढ़ते हैं। वहां हजारों दर्शक दोनों दलों के वीरों की वीरता के साक्षी बनते हैं। अंत में यह आयोजन भाईचारे और परंपरा की जीत के साथ समाप्त होता है।