अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर आज धर्मध्वज का ऐतिहासिक आरोहण हुआ। इस विशेष अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रामत्व की मूल भावना, राष्ट्र निर्माण के संकल्प और सामाजिक एकता की बात कही। कार्यक्रम में उपस्थित मोहन भागवत ने कहा कि यह मंदिर उस स्वप्न का साकार रूप है, जिसके लिए अनगिनत श्रद्धालुओं ने अपने जीवन समर्पित किए। धर्मध्वज को भारत की आध्यात्मिक शक्ति की पहचान बताया गया।
‘राम भाव से जोड़ते हैं’—प्रधानमंत्री मोदी
प्रधानमंत्री ने कहा कि भगवान राम व्यक्ति के कुल या वंश नहीं, बल्कि भाव, भक्ति और मूल्य देखते हैं। उन्होंने बताया कि पिछले 11 वर्षों में समाज के हर वर्ग—महिला, दलित, पिछड़े, किसान, श्रमिक, आदिवासी और युवा—को विकास के केंद्र में रखा गया है। पीएम ने कहा कि 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य तभी पूरा होगा जब हर नागरिक सशक्त हो।
‘राम का अर्थ है मर्यादा’—जीवन मूल्य पर जोर
अपने वक्तव्य में पीएम मोदी ने कहा कि राम सर्वोच्च मर्यादा, सदाचार और आदर्श जीवन का प्रतीक हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हमें राम के चरित्र की गहराई को समझते हुए आचरण में उनका अनुसरण करना चाहिए। यह धर्मध्वज हमें कर्म, कर्तव्य और सत्यनिष्ठा की दिशा दिखाता रहेगा।
दिव्य प्रांगण में सप्त ऋषियों और भक्तों का स्मरण
प्रधानमंत्री ने बताया कि मंदिर परिसर में सप्त मंदिर निर्मित किए गए हैं, जिनमें माता शबरी, निषादराज, महर्षि वाल्मीकि, महर्षि वशिष्ठ, विश्वामित्र, अगस्त्य और संत तुलसीदास के मंदिर शामिल हैं। जटायु और गिलहरी की मूर्तियां छोटे से छोटे प्रयास की महत्ता को दर्शाती हैं, जो बड़े संकल्पों को सिद्ध करने में महत्वपूर्ण होते हैं।
‘प्राण जाए पर वचन न जाए’—धर्मध्वज का संदेश
धर्मध्वज के महत्व को बताते हुए पीएम मोदी ने कहा कि यह प्रेरणा देगा कि वचन और कर्तव्य सर्वोपरि हैं। ध्वज समाज में शांति, सहयोग, भेदभाव से मुक्ति और सुख की कामना का प्रतीक है। उन्होंने इसे संघर्ष से सृजन तक की लंबी यात्रा का परिणाम बताया, जो करोड़ों लोगों की आस्था और धैर्य की विजय है।
‘सपने से भी अधिक शुभकर मंदिर’—मोहन भागवत
मोहन भागवत ने कहा कि इस दिन के लिए असंख्य भक्तों ने अपने प्राण अर्पित किए। उन्होंने बताया कि धर्मध्वज का भगवा रंग और उस पर अंकित रघुकुल का कोविदार वृक्ष त्याग, शांति और संकल्प का प्रतीक है। भागवत ने कहा कि जैसा सपना देखा गया था, मंदिर उससे भी अधिक शुभकर और पूर्ण रूप में खड़ा हुआ है, जो समृद्ध और शांतिपूर्ण भारत के निर्माण का मार्ग दिखाता है।