UP News: उत्तर प्रदेश का पर्यटन विभाग प्रदेश में पर्यटन की नई संभावनाओं और योजनाओं पर लगातार कार्य कर रहा है। इसी कड़ी में भारतीय पुरातत्व विभाग (एएसआई) ने भी आगरा सर्किल के ऐतिहासिक महत्व वाले 25 स्मारकों तक पर्यटक पहुंचने की योजना बनाई है। जिसमें आगरा, मैनपुरी, मथुरा, एटा, अलीगढ़, हाथरस और इटावा जिलों के पर्यटन स्थल शामिल हैं। फिलवक्त ये पर्यटन स्थल वीरान हैं। यहां बहुत ही कम संख्या में पर्यटन पहुंचते हैं।
मोहब्बत की निशानी ताजमहल
आगरा में पर्यटकों की पहली पसंद मोहब्बत की निशानी ताजमहल है। इसके अलावा आगरा का लाल किला और फतेहपुर सीकरी स्मारक पर पर्यटकों की भीड़ देखने के मिलती है। हालांकि आगरा में कई ऐतिहासिक महत्व वाले दर्जनों स्मारक हैं। भारतीय पुरातत्व विभाग का (एएआई) ने आगरा सर्किल में स्थित 25 ऐसे ही पर्यटक स्थलों को सजाने संवारने की विशेष प्लानिंग की है।
स्मारकों का ऐतिहासिक महत्व
एएसआई आगरा सर्किल की अधीक्षण पुरातत्वविद स्मिथा एस. कुमार ने बताया कि सर्किल के कई संरक्षित स्मारक चयनित किए गए हैं। इन स्मारकों का ऐतिहासिक महत्व है। ऐसे में सर्किल के सभी सात जिलों आगरा, मैनपुरी, मथुरा, एटा, अलीगढ़, हाथरस और इटावा के 25 स्मारकों को योजना में शामिल किया गया है। पहले चरण में आगरा के स्मारकों पर फोकस किया जाएगा। इनमें रोमन कैथोलिक सेमेट्री, मरियम टाम्ब, बेबी ताज, अकबर टॉम्ब, मरियम टॉम्ब और अन्य शामिल हैं।
एत्माद-उद-दौला का मकबरा
आगरा में यमुना किनारे एत्माद-उद-दौला का मकबरा है, जो सन 1622 और 1628 में बनाया गया था। यह सफेद संगमरमर और लाल पत्थर से बना है। जिसका निर्माण मुगल बादशाह जहांगीर की बेगम नूरजहां ने पिता मिर्ज़ा ग़ियास बेग की याद में बनवाया था। जिसमें सफेद संगमरमर पर शानदार पच्चीकारी की गई है। जिससे लगता है कि स्मारक में रत्न जड़े हैं। इसलिए एत्माद-उद-दौला मकबरा रत्नों का डिब्बा कहा जाने लगा। हालांकि इसकी आकृति ताजमहल जैसी दिखती है, जो अब बेबी ताज के नाम से मशहूर है। यहां हर दिन पर्यटक आते हैं, हालांकि संख्या बेहद कम रहती है।
रामबाग स्मारक
मुगल वंश का संस्थापक बाबर 10 मई-1526 को आगरा पहुंचा था. यमुना किनारे गर्मी से परेशान बाबर ने यमुना किनारे हिश्त-बहिश्त यानी अपनी आरामगाह बनवाई थी। दो मंजिला बारादरी की आरामगाह में तलघर (तहखाने) में ठंडक रहती थी। बाबर ने गर्मी से बचाव के लिए वहां पर जल प्रपात, नहरें, बड़ा कुआं, हम्माम बनवाए. हरियाली विकसित कराई। अब इसी आरामगाह का नाम रामबाग है। यह एएसआई संरक्षित स्मारक है। जहां पर टिकट से ही विजिटर्स को एंट्री मिलती है। रामबाग में चंदन, अमरूद, शहतूत, खजूर, आम समेत कई फलदार व छायादार पेड़ हैं।
चीनी का रोजा
आगरा में यमुना किनारे चीनी का रोजा स्मारक है, जो मुगल बादशाह जहांगीर और बादशाह शहंशाह शाहजहां के दरबार में वजीर रहे मुल्ला शुक्रुल्लाह शिराजी अफजल खां 'अल्लामी' का है. शिराजी ने सन 1628 से 1639 के बीच यमुना किनारे' चीनी का रोजा ' बनवाया था. सन 1639 में शिराजी की मौत लाहौर में हुई थी, लेकिन शिराजी की इच्छानुसार आगरा में यमुना किनारे बनाए गए मकबरा ' चीनी का रोजा ' में उसे दफनाया गया। इस मकबरे में मुगल वास्तुशिल्प पर पारसी प्रभाव साफ झलकता है, जो एकमात्र पारसी इमारत भी है। 'चीनी का रोजा' एएसआई का संरक्षित स्मारक है. जहां प्रवेश शुल्क लागू नहीं है।