Shajapur history:..प्रदेश का शाजापुर ज़िला केवल भौगोलिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि ऐतिहासिक रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण है। महाभारत काल से लेकर मुग़ल और मराठा शासन तक, इस क्षेत्र ने अनेक ऐतिहासिक उतार-चढ़ाव देखे हैं। खास बात यह है कि कभी इसे ‘शाहजहांपुर’ कहा जाता था, जो मुग़ल सम्राट शाहजहां के नाम पर रखा गया था। लेकिन समय के साथ इसका नाम ‘शाजापुर’ में बदल गया। आइए जानते हैं, शाजापुर का गौरवशाली इतिहास और नाम परिवर्तन की रोचक दास्तान।
महाभारत काल से है शाजापुर का संबंध
शाजापुर का उल्लेख प्राचीन भारतीय इतिहास में भी मिलता है। कहा जाता है कि महाभारत काल में यह क्षेत्र ‘खांखरा खेड़ी’ नाम से जाना जाता था। यहीं से इस क्षेत्र की ऐतिहासिक यात्रा की शुरुआत मानी जाती है।
मुग़ल सम्राट शाहजहां ने बसाया ‘शाहजहांपुर’
17वीं शताब्दी में जब मुग़ल बादशाह शाहजहां का दक्षिण भारत की ओर सैन्य अभियान शुरू हुआ, तब उनकी सेना को यह क्षेत्र विश्राम स्थल के रूप में बेहद उपयुक्त लगा। यहां की प्राकृतिक सुंदरता, जलवायु और सामरिक स्थिति को देखते हुए उन्होंने इसे बसाया और इसका नाम ‘शाहजहांपुर’ रखा।
सिंधिया शासन में बदला नाम
1732 में मुग़लों के पतन के बाद यह इलाका मराठा साम्राज्य के अधीन आ गया। सिंधिया शासकों ने प्रशासनिक रूप से इस क्षेत्र का पुनर्गठन किया और ‘शाहजहांपुर’ का अपभ्रंश नाम ‘शाजापुर’ प्रचलन में आया। इसके बाद यही नाम आधिकारिक रूप से स्वीकार कर लिया गया।
मराठा और परमारों की ऐतिहासिक छाप
शाजापुर का इतिहास सिर्फ मुग़लों तक सीमित नहीं रहा। परमार वंश और मराठा शासन के दौरान भी यह क्षेत्र प्रशासनिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र रहा। मराठाओं ने यहां मंदिरों, भवनों और सरायों का निर्माण करवाया, जो आज भी इस क्षेत्र की विरासत के रूप में मौजूद हैं।
आज का शाजापुर: एक ऐतिहासिक नगर
वर्तमान में शाजापुर एक शांत, ऐतिहासिक और प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण जिला है। यहां का नाम भले ही समय के साथ बदला हो, लेकिन इसकी ऐतिहासिक पहचान आज भी कायम है। यह शहर उन गिने-चुने स्थानों में से है, जो मुग़ल से लेकर मराठा काल तक इतिहास की परतों में दर्ज हैं।