होली 2026 पर विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में रंग-गुलाल नहीं उड़ेंगे। एक साल पहले गर्भगृह में गुलाल के दौरान लगी आग में एक सेवक की मौत के बाद मंदिर प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। इस बार होलिका पर्व 2 और 3 मार्च को प्रतीकात्मक रूप से मनाया जाएगा। संपूर्ण मंदिर परिसर और महाकाल लोक में बाहरी रंग-गुलाल के प्रवेश और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
रंग-गुलाल पूरी तरह प्रतिबंधित
मंदिर प्रबंध समिति ने स्पष्ट किया है कि इस वर्ष गर्भगृह से लेकर बाहरी परिसर और महाकाल लोक तक किसी भी प्रकार का रंग-गुलाल ले जाना और खेलना पूर्णतः वर्जित रहेगा। यह निर्णय 2024 में गर्भगृह में गुलाल उड़ाने के दौरान हुई आग की घटना के बाद लिया गया था। प्रशासन का कहना है कि परंपराओं की मर्यादा और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोपरि है।
जांच के बाद ही मिलेगा प्रवेश
होलिका पर्व को देखते हुए मंदिर परिसर और महाकाल लोक में कार्यरत पुजारी, पुरोहित, अधिकारी, कर्मचारी, सुरक्षाकर्मी और आउटसोर्स स्टाफ तक को बिना जांच प्रवेश नहीं मिलेगा। किसी को भी रंग-गुलाल लाने की अनुमति नहीं होगी। श्रद्धालुओं की भी सघन तलाशी के बाद ही एंट्री दी जाएगी। आपस में रंग लगाने पर भी सख्त रोक रहेगी।
सीसीटीवी से होगी चौकसी
सभी प्रवेश द्वारों पर तैनात सुरक्षाकर्मी विनम्र व्यवहार के साथ सख्ती से जांच करेंगे। मंदिर कंट्रोल रूम से सीसीटीवी कैमरों के जरिए हर गतिविधि पर नजर रखी जाएगी, ताकि कोई भी व्यक्ति प्रतिबंधित सामग्री अंदर न ले जा सके। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नियमों के उल्लंघन पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
त्रिकाल आरती में हर्बल गुलाल अर्पित
हालांकि भक्तों के लिए रंग-गुलाल प्रतिबंधित है, लेकिन भगवान श्री महाकालेश्वर की त्रिकाल आरती में प्रतीकात्मक रूप से 1-1 किलो हर्बल गुलाल अर्पित किया जाएगा। यह गुलाल मंदिर की कोठार शाखा द्वारा अधिकृत पुजारियों को उपलब्ध कराया जाएगा। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि पर्व को गरिमा, सौहार्द और अनुशासन के साथ मनाएं।
प्रशासन की अपील
मंदिर प्रशासन ने साफ किया है कि होली का उत्सव धार्मिक परंपरा और सुरक्षा मानकों के अनुरूप ही मनाया जाएगा। किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। आदेशों का अक्षरशः पालन अनिवार्य है और उल्लंघन की स्थिति में संबंधित व्यक्ति स्वयं जिम्मेदार होगा।