नई दिल्ली। गणतंत्र दिवस समारोह में गृह मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत झांकी देश की आपराधिक न्याय व्यवस्था में आए ऐतिहासिक बदलाव को प्रभावशाली ढंग से दर्शाती है। वर्ष 2023 में अधिनियमित और 1 जुलाई 2024 से लागू हुए तीन नए आपराधिक कानून—भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम—इस झांकी का मुख्य विषय हैं। झांकी ‘दण्ड से न्याय की ओर’ की अवधारणा पर आधारित है, जो न्याय व्यवस्था को अधिक संवेदनशील, तकनीक-सक्षम और नागरिक-केंद्रित बनाने के संकल्प को रेखांकित करती है।
झांकी के अग्र भाग में नए संसद भवन के ऊपर स्थापित तीन नई कानून पुस्तकों को दर्शाया गया है। यह दृश्य भारत के संवैधानिक मूल्यों, लोकतांत्रिक परंपराओं और कानून के शासन के प्रति देश की प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
झांकी के मध्य भाग में आपराधिक न्याय प्रक्रिया में आए तकनीकी और प्रक्रियात्मक बदलावों को प्रदर्शित किया गया है। इसमें फॉरेंसिक विशेषज्ञ को अपराध स्थल की जांच करते हुए और पुलिस अधिकारी को ई-साक्ष्य ऐप के माध्यम से डिजिटल साक्ष्य एकत्र करते हुए दिखाया गया है। एलईडी डिस्प्ले पैनल नए कानूनों में तकनीक के बढ़ते उपयोग को दर्शाता है, जिसमें ई-साक्ष्य से डिजिटल प्रमाण संग्रह, नाफिस (नफीस) के जरिए डिजिटल फिंगरप्रिंट विश्लेषण और ‘न्याय श्रुति’ के माध्यम से वर्चुअल सुनवाई जैसे पहलू शामिल हैं। वहीं मोबाइल फॉरेंसिक वैन अपराध स्थल पर त्वरित पहुंच और आधुनिक जांच प्रणाली की क्षमता का प्रतीक है।
झांकी के पीछे के भाग में एक महिला अधिकारी को एकीकृत नियंत्रण कक्ष प्रणाली संचालित करते हुए दर्शाया गया है। यह समयबद्ध न्याय, त्वरित पुलिस प्रतिक्रिया, पीड़ित-केंद्रित दृष्टिकोण और सीसीटीवी जैसे डिजिटल संसाधनों के प्रभावी उपयोग को दर्शाता है। झांकी का पिछला हिस्सा विभिन्न भाषाओं में पुस्तकों से सुसज्जित है, जो नए कानूनों की देश के हर नागरिक तक पहुंच और उनमें निहित राष्ट्रीय एकता की भावना को प्रतीकात्मक रूप से प्रस्तुत करता है।
भूमि तत्वों में प्रशिक्षित पुलिसकर्मी, फॉरेंसिक विशेषज्ञ, विशेष कमांडो इकाइयों में महिला अधिकारियों की बढ़ती भागीदारी और बीट पेट्रोलिंग के दृश्य शामिल हैं। यह सब मिलकर समावेशी, पेशेवर, पारदर्शी और जनता-केंद्रित कानून व्यवस्था के प्रति देश के सामूहिक संकल्प को दर्शाता है