हांगकांग के ताई पो इलाके में स्थित वांग फुक कोर्ट हाउसिंग कॉम्प्लेक्स में लगी भीषण आग ने तीन दिन तक कहर बरपाया। ऐतिहासिक रूप से यह हांगकांग की 80 सालों में सबसे भयावह आग मानी जा रही है। इस हादसे में कम से कम 128 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि दर्जनों अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। फायर विभाग ने जानकारी दी कि राहत और बचाव कार्य लगभग पूरा हो चुका है। हादसा तब हुआ जब 32-मंजिला ऊंचाई वाले आठ टावरों में से सात पर आग ने तेजी से कब्जा कर लिया। यह पूरा कॉम्प्लेक्स बांस की मचान और हरे जाल से ढका हुआ था, जिससे आग तेजी से फैल गई।
हजारों लोग रहते थे कॉम्प्लेक्स में
वांग फुक कोर्ट कॉम्प्लेक्स में 4,600 से अधिक लोग रहते हैं। बुधवार दोपहर अचानक लगी आग देखते ही देखते कई फ्लोर पर फैल गई और लोगों के पास भागने का पर्याप्त समय नहीं मिला। हांगकांग के सुरक्षा प्रमुख क्रिस टैंग ने कहा कि निरीक्षण के दौरान कई यूनिट्स में खिड़कियों को ब्लॉक करने वाले ज्वलनशील फोम बोर्ड जैसे खतरनाक निर्माण सामग्री का इस्तेमाल पाया गया, जिसने स्थिति को और भयावह बना दिया। अनुमान लगाया जा रहा है कि इसी वजह से लोग फंस गए और ज्यादा मौतें हुईं। यह 1948 के बाद सबसे भीषण आग है, जब एक वेयरहाउस हादसे में 176 लोगों की मौत हुई थी।
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तीन गिरफ्तार, लापरवाही की आशंका
पुलिस ने हादसे के बाद बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रेस्टीज कंस्ट्रक्शन कंपनी के दो निदेशकों और एक इंजीनियरिंग कंसल्टेंट को गिरफ्तार किया है। यह कंपनी पिछले एक साल से बिल्डिंग का मेंटेनेंस संभाल रही थी। पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जांच में गंभीर लापरवाही सामने आई है, जिसने इस बड़े हादसे को जन्म दिया। पुलिस सुपरिटेंडेंट एलीन चुंग ने बताया कि इन अधिकारियों ने सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया और खतरनाक सामग्री का उपयोग किया गया, जिसके कारण आग तेजी से फैल गई।
सैकड़ों लोग अभी भी लापता
डिप्टी फायर सर्विसेज डायरेक्टर डेरेक चैन ने बताया कि गुरुवार सुबह तक 279 लोग लापता सूची में थे, हालांकि यह आंकड़ा 24 घंटे से अपडेट नहीं हुआ है। कई लोग अब भी अपनी यूनिट्स में फंसे हो सकते हैं, इसलिए बचाव दल सातों टावरों को एक-एक कर खंगाल रहा है। फायर विभाग के पास 25 मदद कॉल्स का अभी तक कोई जवाब नहीं मिल पाया है। दुनिया की सबसे घनी आबादी वाले शहरों में से एक हांगकांग में इस तरह की घटना ने प्रशासन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऊंचे-ऊंचे टावरों में रहने वाले लोग सुरक्षा को लेकर अब और अधिक चिंतित दिखाई दे रहे हैं।