मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर अब रोजमर्रा की चीजों तक पहुंचने लगा है। तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित होने से अब बीयर और अन्य पेय पदार्थों की कीमतों पर दबाव बढ़ गया है। भारत भले ही युद्ध क्षेत्र से दूर हो, लेकिन कच्चे तेल और एलपीजी के आयात पर निर्भरता के कारण इसका सीधा असर यहां भी दिखने लगा है।
बीयर महंगी होने के पीछे बड़ी वजह
बीयर की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह गैस की कमी है। उत्पादन के लिए जरूरी भट्टियां गैस पर निर्भर होती हैं, और सप्लाई घटने से लागत बढ़ गई है। इसके अलावा कांच की बोतलों की कीमत में करीब 20% तक उछाल आ चुका है। Brewers Association of India के अनुसार, कंपनियां अब कीमत बढ़ाने के दबाव में हैं।
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पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स ने बढ़ाई मुश्किल
सिर्फ उत्पादन ही नहीं, बल्कि पैकेजिंग भी महंगी हो गई है। एल्युमीनियम की कमी, कागज के कार्टन और लेबल की बढ़ती कीमतों ने कुल लागत को और बढ़ा दिया है। शिपिंग में देरी और सप्लाई चेन में रुकावट के कारण कंपनियों को कच्चे माल की उपलब्धता में भी दिक्कत हो रही है, जिससे पूरी इंडस्ट्री पर दबाव बन गया है।
गर्मियों में 12-15% तक बढ़ सकते हैं दाम
इंडस्ट्री का अनुमान है कि आने वाले समय में बीयर की कीमतों में 12 से 15 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो सकती है। यह ऐसे समय में हो रहा है जब गर्मियों में बीयर की मांग सबसे ज्यादा रहती है। अगर हालात जल्दी नहीं सुधरे, तो उपभोक्ताओं को आने वाले महीनों में महंगी बीयर का सामना करना पड़ सकता है।