मध्य पूर्व में जारी तनाव और होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी ने दुनिया के सामने बड़े तेल संकट का खतरा खड़ा कर दिया है। कई देशों का तेल उत्पादन तेजी से घट रहा है, जबकि वैश्विक बाजार अब रिजर्व में जमा तेल के सहारे चल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर युद्ध लंबा चला तो तेल भंडार तेजी से खत्म होंगे और दुनिया भर में ईंधन की कीमतें नई ऊंचाई पर पहुंच सकती हैं।
होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से बढ़ा संकट
दुनिया की सबसे अहम तेल सप्लाई रूट मानी जाने वाली होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी का असर अब वैश्विक बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। मध्य पूर्व से कच्चे तेल की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे कई देशों में तेल की उपलब्धता कम हो रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक हालात जल्द सामान्य होने की उम्मीद नहीं दिख रही और युद्ध लंबे समय तक खिंच सकता है।
तेल उत्पादन में भारी गिरावट
मध्य पूर्व के बड़े तेल उत्पादक देशों में उत्पादन लगातार गिर रहा है। सऊदी अरब इराक ईरान और कुवैत जैसे देशों में प्रतिदिन लाखों बैरल तेल उत्पादन कम हुआ है। रिपोर्ट्स के अनुसार आने वाले दिनों में वैश्विक सप्लाई में कमी और बढ़ सकती है। इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर तेजी के रूप में दिखाई देने लगा है।
रिजर्व तेल के सहारे चल रही दुनिया
तेल उत्पादन घटने के बाद कई देश अब अपने स्टोरेज में जमा रिजर्व तेल का इस्तेमाल कर रहे हैं। पहले माना जा रहा था कि दुनिया के पास पर्याप्त तेल भंडार मौजूद हैं, लेकिन मौजूदा हालात ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि स्टोरेज में रखा गया सारा तेल तुरंत इस्तेमाल के लिए उपलब्ध नहीं होता क्योंकि उसका बड़ा हिस्सा परिचालन जरूरतों में फंसा रहता है।
बाजार में बढ़ेगा दबाव और महंगाई
विश्लेषकों के मुताबिक अगर सप्लाई बाधित रही तो आने वाले महीनों में तेल बाजार पर भारी दबाव बढ़ सकता है। इससे पेट्रोल डीजल और अन्य ईंधन उत्पादों की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है। माना जा रहा है कि विकसित देशों के व्यावसायिक तेल भंडार जल्द ही तनावपूर्ण स्तर तक पहुंच सकते हैं जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ेगा।
लंबा युद्ध बना दुनिया के लिए खतरा
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मध्य पूर्व में संघर्ष जल्द खत्म नहीं हुआ तो दुनिया के सामने गंभीर ऊर्जा संकट खड़ा हो सकता है। लगातार खाली होते तेल भंडार भविष्य में बड़ी सप्लाई कमी पैदा कर सकते हैं। ऐसे में बाजार में अस्थिरता बढ़ेगी और वैश्विक स्तर पर महंगाई का नया दौर शुरू होने की आशंका जताई जा रही है।