Hormuz Oil Crisis : अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद ग्लोबल ऑयल मार्केट में सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। होर्मुज स्ट्रेट लगभग बंद होने से रोजाना करीब 2 करोड़ बैरल कच्चे तेल और रिफाइंड प्रोडक्ट की सप्लाई प्रभावित हुई। ये दुनिया की कुल खपत का करीब पांचवां हिस्सा है। इसके बावजूद शुरुआती तेजी के बाद क्रूड की कीमतें 90-100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी रहीं। IMF के मुताबिक, इसकी वजह बाजार में मौजूद कुछ ऐसे बफर थे, जिन्होंने सप्लाई शॉक का असर कम किया।
1.1 अरब बैरल बाजार तक नहीं पहुंचा
मई के अंत तक 1.1 अरब बैरल से ज्यादा कच्चा तेल बाजार तक नहीं पहुंच पाया। ये सामान्य ग्लोबल खपत के करीब 10 दिनों के बराबर है। IMF के अनुसार, ये कमी 1973 के ऑयल शॉक, ईरान-इराक युद्ध और खाड़ी युद्ध के दौरान दर्ज कमी से भी ज्यादा थी। सऊदी अरब ने यानबू तक पाइपलाइन और UAE ने फुजैराह की एक्सपोर्ट सुविधाओं के जरिए कुछ सप्लाई बचाने की कोशिश की, लेकिन ये रास्ते होर्मुज से होने वाली सामान्य सप्लाई की पूरी भरपाई नहीं कर सके।
तीन बफर ने संभाला पूरा बाजार
तेल बाजार को संभालने में तीन बड़े फैक्टर काम आए। ऊंची कीमतों के कारण एशिया समेत कई जगहों पर तेल की मांग कम हुई। इसके अलावा खाड़ी देशों के बाहर के उत्पादकों ने 2025 के मुकाबले रोजाना करीब 20 लाख बैरल अतिरिक्त उत्पादन किया। अमेरिका के साथ वेनेजुएला, गुयाना और रूस ने भी सप्लाई बढ़ाई। तीसरा और सबसे अहम सहारा ग्लोबल इन्वेंट्री बनी। मार्च से मई के बीच रोजाना करीब 40 लाख बैरल की कमी को बड़े पैमाने पर जमा तेल से पूरा किया गया।
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अब खत्म हो चुका है सप्लाई का सहारा
यही स्थिति अब IMF की चिंता बढ़ा रही है। युद्ध से पहले दुनिया में रोजाना मांग से करीब 20 लाख बैरल ज्यादा तेल उपलब्ध था, लेकिन ये सरप्लस अब खत्म हो चुका है। अतिरिक्त उत्पादन क्षमता का इस्तेमाल हो गया और ग्लोबल इन्वेंट्री भी घट चुकी है। ऐसे में अगर आगे कोई नया सप्लाई शॉक आता है तो बाजार के पास उसे संभालने के लिए पहले जैसा सुरक्षा कवच नहीं रहेगा। होर्मुज पूरी तरह खुलने के बाद भी स्थिति तुरंत सामान्य नहीं होगी।
दो-तीन महीने लग सकते हैं सामान्य होने में
होर्मुज स्ट्रेट खुलने के बावजूद तेल की सप्लाई को पूरी तरह बहाल होने में दो से तीन महीने लग सकते हैं। शिपिंग व्यवस्था, इंश्योरेंस और ऑपरेटरों का भरोसा दोबारा कायम करने में वक्त लगेगा। अगर कुछ तेल कुओं को आर्थिक कारणों से तुरंत शुरू नहीं किया जा सका तो लंबे समय तक उत्पादन प्रभावित हो सकता है। IMF ने ऐसे हालात से बचने के लिए रणनीतिक और कमर्शियल तेल भंडार दोबारा भरने, अहम समुद्री रास्तों पर निर्भरता घटाने और रिन्यूएबल एनर्जी समेत ऊर्जा स्रोतों में विविधता बढ़ाने की जरूरत बताई है।