Strait of Hormuz को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या समुद्र में टोल टैक्स वसूला जा सकता है और इस अहम समुद्री रास्ते का असली मालिक कौन है? दुनिया के करीब 20% तेल व्यापार से जुड़े इस 33 किमी चौड़े गलियारे को लेकर दावे-प्रतिदावे तेज हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय कानून की सच्चाई कुछ और ही कहानी बयां करती है।
होर्मुज: दुनिया की लाइफलाइन क्यों?
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक व्यापार का सबसे अहम समुद्री मार्ग है। फारस की खाड़ी से निकलने वाला तेल और गैस इसी रास्ते से पूरी दुनिया तक पहुंचता है। इसकी भौगोलिक स्थिति इसे रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील बनाती है, इसलिए यहां किसी भी तनाव का असर सीधे ग्लोबल मार्केट पर पड़ता है।
किसका है असली अधिकार?
Iran, Oman और United Arab Emirates—तीनों देश इस जलमार्ग से जुड़े हैं। अंतरराष्ट्रीय नियमों के मुताबिक हर देश को अपनी तटरेखा से 12 समुद्री मील तक का अधिकार मिलता है, लेकिन इसके बाद यह साझा समुद्री क्षेत्र माना जाता है। ‘मीडियन लाइन’ सिद्धांत के अनुसार होर्मुज का उत्तरी हिस्सा ईरान और दक्षिणी हिस्सा ओमान के अधिकार में आता है, लेकिन कोई भी देश पूरे मार्ग का मालिक नहीं है।
क्या समुद्र में टोल वसूली संभव है?
United Nations के समुद्री कानून UNCLOS के तहत किसी भी देश को अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूलने का अधिकार नहीं है। जहाजों को “शांतिपूर्ण मार्ग” (Innocent Passage) का अधिकार दिया गया है। यानी खुले समुद्र में टोल प्लाजा बनाकर टैक्स वसूलना पूरी तरह अवैध है।
ईरान और अमेरिका का टकराव क्यों?
United States और ईरान के बीच विवाद सिर्फ नियंत्रण का नहीं, बल्कि रणनीतिक दबाव और आर्थिक ताकत का भी है। ईरान इस रास्ते को अपने प्रभाव का हथियार बनाना चाहता है, जबकि अमेरिका इसे खुला रखना चाहता है। यही कारण है कि दोनों के बीच बयानबाजी और तनाव लगातार बढ़ रहा है।
नहरों पर टोल, लेकिन समुद्र में नहीं
Suez Canal और Panama Canal जैसे कृत्रिम समुद्री रास्तों पर टोल वसूला जाता है, क्योंकि उनका निर्माण और रखरखाव किया जाता है। लेकिन प्राकृतिक समुद्री मार्ग, जैसे होर्मुज, पूरी दुनिया की साझा संपत्ति माने जाते हैं—जहां टोल वसूली की अनुमति नहीं है।