मध्य पूर्व में शांति की उम्मीदें एक बार फिर अनिश्चितता के साये में आ गई हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ते सैन्य तनाव, जहाज की जब्ती और ड्रोन हमलों की खबरों ने संकेत दे दिया है कि हालात किसी भी वक्त बिगड़ सकते हैं। जहां एक ओर बातचीत की कोशिशें जारी हैं, वहीं दूसरी ओर मैदान में टकराव की स्थिति लगातार गहराती जा रही है।
जहाज जब्ती से बढ़ा विवाद
ओमान की खाड़ी में एक ईरानी झंडे वाले मालवाहक जहाज “टॉस्का” को अमेरिकी नौसेना द्वारा कब्जे में लेने की घटना ने तनाव को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। अमेरिका का दावा है कि जहाज को कई घंटों तक चेतावनी दी गई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिलने पर कार्रवाई की गई। फायरिंग के बाद जहाज के इंजन को निष्क्रिय कर उसे रोक लिया गया।
ईरान की कड़ी प्रतिक्रिया
ईरान ने इस कार्रवाई को सीजफायर का उल्लंघन और “समुद्री डकैती” करार दिया है। तेहरान ने साफ कहा है कि वह इसका जवाब देगा और प्रतिक्रिया कड़ी हो सकती है। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, इस घटना ने क्षेत्र में पहले से चल रही नाजुक शांति प्रक्रिया को खतरे में डाल दिया है।
ड्रोन हमलों से बढ़ी चिंता
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने अमेरिकी सैन्य जहाजों को निशाना बनाते हुए ड्रोन हमले किए हैं। हालांकि इन हमलों के नुकसान की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इससे यह साफ है कि स्थिति तेजी से सैन्य टकराव की ओर बढ़ सकती है।
इस्लामाबाद में बातचीत पर सस्पेंस
तनाव के बीच पाकिस्तान की राजधानी में शांति वार्ता की तैयारियां चल रही हैं। सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडलों के पहुंचने की खबरें हैं। हालांकि ईरान की ओर से अब तक स्पष्ट पुष्टि नहीं हुई है, जिससे बातचीत पर अनिश्चितता बनी हुई है
शर्तों पर अड़ा ईरान
ईरान ने साफ संकेत दिए हैं कि वह अपनी शर्तों पर ही किसी वार्ता में शामिल होगा। इनमें विदेशों में जमी संपत्ति की वापसी और क्षेत्रीय संघर्षों में पूर्ण युद्धविराम जैसे मुद्दे शामिल हैं। इन शर्तों के बिना बातचीत आगे बढ़ना मुश्किल माना जा रहा है।
तेल बाजार पर असर
इस पूरे घटनाक्रम का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी दिखने लगा है। बढ़ते तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में करीब 7% की तेजी दर्ज की गई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में चिंता बढ़ गई है।