भोपाल में एक अंतिम संस्कार के दौरान ऐसा मोड़ आया, जिसने हर किसी को चौंका दिया। चेन्नई से आई महिला का शव देख बेटे ने कहा- ये मेरी मां नहीं। दरअसल अस्पताल की लापरवाही से दो शवों की अदला-बदली हो गई थी। अब सवाल अस्पताल की जिम्मेदारी और सिस्टम की सतर्कता पर उठ रहे हैं। भोपाल के सुरेंद्र विहार बाग मुगालिया निवासी रिटायर्ड शिक्षिका अंबिका सैनी कैंसर से पीड़ित थीं। उनका इलाज चेन्नई के अपोलो अस्पताल में चल रहा था। गुरुवार रात उनकी मौत हो गई और शुक्रवार सुबह 9 बजे एयर कार्गो से उनका शव भोपाल पहुंचा। परिजन अंतिम संस्कार की तैयारी कर ही रहे थे कि बेटा सार्थक बोला—“ये मेरी मां नहीं हैं।”
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बाल देखकर खोले राज़
जब शव की पहचान की गई, तो सिर पर बाल देखकर शक हुआ। पास जाकर देखने पर साफ हो गया कि यह शव अंबिका सैनी का नहीं बल्कि बंगाल के मालबाजार की रहने वाली 39 वर्षीय महिला मनीषा का है। परिजनों ने तुरंत अस्पताल से संपर्क किया।
वाराणसी में बदला गया शव
अस्पताल प्रबंधन ने इस गलती की पुष्टि की और दोनों शवों की अदला-बदली की प्रक्रिया शुरू हुई। अंबिका सैनी और मनीषा के परिजन शव लेकर एंबुलेंस से वाराणसी पहुंचे, जहां शव बदले गए। इसके बाद एक एंबुलेंस भोपाल और दूसरी बंगाल के लिए रवाना हुई।
परिजन बोले, शिकायत नहीं, शायद कोई नाता रहा हो
अंबिका सैनी के पति एन सैनी, जो एयरफोर्स से रिटायर्ड हैं, ने कहा—“हमें किसी से कोई शिकायत नहीं है। शायद उस मृतका से कोई आत्मिक नाता रहा हो, तभी वह हमारे घर तक आई।” शाम को पौने पांच बजे अंबिका सैनी का सही शव भोपाल पहुंचा और पूरे सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।
सवाल बना: क्या अस्पताल इतने लापरवाह हो सकते हैं?
यह घटना एक बड़ी लापरवाही की ओर इशारा करती है। शवों की अदला-बदली ना सिर्फ भावनात्मक क्षति पहुंचाती है, बल्कि व्यवस्था पर भी सवाल उठाती है।