Eco Mode Secrets: अगर आपको कपड़े जल्दी धोने हों, तो अक्सर आप वॉशिंग मशीन में क्विक वॉश का इस्तेमाल करते हैं। वहीं बिजली और पानी बचाने के लिए Eco मोड को एक बेहतरीन विकल्प माना जाता है। लेकिन Eco मोड में कपड़े धुलने में सामान्य प्रोग्राम से ज्यादा समय लगता है। ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल उठता है कि जब मशीन ज्यादा देर तक चल रही है, तो बिजली की बचत कैसे हो सकती है। हालांकि इसका जवाब मशीन के चलने के समय में नहीं, बल्कि पानी गर्म करने और कपड़ों की सफाई के तरीके में छिपा है। तो आइए विस्तार से जानते हैं कि Eco मोड कैसे पानी और बिजली बचाता है.
बिजली की सबसे ज्यादा खपत कहां होती है?
कपड़े धोने की प्रक्रिया तापमान, समय और पानी पर निर्भर करती है। वॉशिंग मशीन में कुल बिजली का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा पानी को गर्म करने में खर्च होता है। ड्रम को घुमाने में बहुत ही मामूली बिजली लगती है। ऐसे में पानी का तापमान कम रखने से एनर्जी की खपत घट सकती है।
Eco मोड का तरीका
Eco मोड में पानी को ज्यादा गर्म नहीं किया जाता। इसलिए डिटर्जेंट को कपड़ो के दाग और गंदगी हटाने के लिए थोड़ा ज्यादा वक्त चाहिए होता है। कम तापमान पर डिटर्जेंट को काम करने का पूरा मौका देने के लिए ही Eco मोड का वॉश साइकल लंबा रखा जाता है। ड्रम भले ही ज्यादा देर तक घूमता है, लेकिन हीटर बंद रहने से बिजली बहुत कम खर्च होती है।
Eco मोड से कितनी होती है बचत
कम तापमान पर कपड़े धोने का सीधा असर बिजली की खपत पर पड़ता है. आंकड़ों के मुताबिक, गर्म पानी से होने वाली धुलाई की तुलना में कम तापमान वाला वॉश 30 से 60 प्रतिशत तक बिजली की बचत हो सकती है, जिससे आपके बिजली के बिल में सीधा असर पड़ता है। Eco मोड को इस तरह से डिजाइन किया जाता है कि यह नॉर्मल वॉश की तुलना में कम पानी का इस्तेमाल करें।
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क्या हर तरह के कपड़ों के लिए सही है Eco मोड
Eco मोड रोजमर्रा के हल्के या सामान्य गंदे कपड़ों के लिए बिल्कुल परफेक्ट है, लेकिन बहुत ज्यादा गंदे कपड़ों या गहरे दागों के लिए कम तापमान वाली पानी काफी नहीं होता है। ऐसी स्थिति में सामान्य वॉश प्रोग्राम बेहतर ऑप्शन हो सकता है। अगर मशीन में क्षमता से ज्यादा कपड़े ठूंस दिए जाएं, तो Eco मोड में सफाई ठीक से नहीं हो पाएगी।