Ice Cream : 122 साल पहले एक मेले में हुई थी आइसक्रीम कोन की शुरुआत। आज दुनिया भर में जिस कोन में आइसक्रीम खाना लोगों की पसंद बन चुका है, उसकी शुरुआत एक दिलचस्प संयोग से हुई थी। कहा जाता है कि साल 1904 में अमेरिका के सेंट लुईस शहर में आयोजित विश्व मेले के दौरान एक ऐसी घटना हुई, जिसने आइसक्रीम परोसने का तरीका हमेशा के लिए बदल दिया। एक छोटी-सी समस्या का निकला यह अनोखा समाधान आज पूरी दुनिया में लोकप्रिय हो चुका है.
मेले में खत्म हो गए थे बर्तन
साल 1904 के विश्व मेले में बड़ी संख्या में लोग आइसक्रीम खाने पहुंचे थे. भीड़ इतनी ज्यादा थी कि एक आइसक्रीम विक्रेता के पास मौजूद कटोरियां और प्लेटें जल्दी ही खत्म हो गईं। ग्राहक लगातार आ रहे थे, लेकिन बिना बर्तन के आइसक्रीम देना मुश्किल हो गया। ऐसे समय में दुकानदार के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई.
पड़ोसी विक्रेता ने दिया अनोखा सुझाव
आइसक्रीम स्टॉल के पास ही एक अन्य विक्रेता पतली और कुरकुरी वफ़ल जैसी मिठाई बेच रहा था। जब उसने आइसक्रीम वाले की परेशानी देखी, तो उसने अपनी वफ़ल को मोड़कर शंकु यानी कोन का आकार बना दिया। इसके बाद उसी में आइसक्रीम भरकर ग्राहकों को दी गई। लोगों को यह तरीका बहुत पसंद आया क्योंकि इससे अलग से बर्तन की जरूरत नहीं रही और कोन को भी आइसक्रीम के साथ खाया जा सकता था.
ग्राहकों को खूब पसंद आया नया तरीका
मेले में आए लोगों ने इस नए अंदाज को हाथों-हाथ अपनाया। कोन में आइसक्रीम खाना आसान भी था और स्वाद का नया अनुभव भी देता था. धीरे-धीरे दूसरे विक्रेताओं ने भी यही तरीका अपनाना शुरू कर दिया। इसके बाद आइसक्रीम कोन की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी और यह दुनिया के कई देशों तक पहुंच गया.
किसे माना जाता है इसका श्रेय?
आइसक्रीम कोन की शुरुआत को लेकर अलग-अलग दावे किए जाते हैं. कुछ लोग इसका श्रेय आइसक्रीम विक्रेता को देते हैं, जबकि कुछ इतिहासकार वफ़ल बेचने वाले विक्रेता को इसका असली विचार देने वाला मानते हैं। हालांकि अधिकांश ऐतिहासिक विवरण 1904 के सेंट लुईस विश्व मेले को आइसक्रीम कोन की लोकप्रिय शुरुआत का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव मानते हैं.
समय के साथ बदलता गया कोन
शुरुआत में कोन हाथ से बनाए जाते थे, लेकिन बाद में मशीनों की मदद से बड़े पैमाने पर इनका उत्पादन शुरू हुआ. आज बाजार में साधारण कोन, शुगर कोन, चॉकलेट कोटेड कोन और कई तरह के फ्लेवर वाले कोन उपलब्ध हैं। आइसक्रीम कंपनियां भी अलग-अलग डिज़ाइन और स्वाद के कोन पेश करती हैं ताकि ग्राहकों को नया अनुभव मिल सके.
आज भी उतनी ही लोकप्रिय है आइसक्रीम कोन
आज आइसक्रीम कोन सिर्फ एक सर्विंग तरीका नहीं, बल्कि आइसक्रीम खाने का सबसे पसंदीदा अंदाज बन चुका है. बच्चों से लेकर बड़े तक, हर उम्र के लोग कोन वाली आइसक्रीम का आनंद लेते हैं। 122 साल पहले मेले में बर्तनों की कमी से निकला यह साधारण-सा जुगाड़ आज दुनिया भर की आइसक्रीम संस्कृति का अहम हिस्सा बन चुका है। यह कहानी बताती है कि कई बार छोटी-सी समस्या का आसान समाधान भी इतिहास रच सकता है.