Illegal Foreign Nationals Living: भारत में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों और घुसपैठियों की पहचान तथा उनके निर्वासन को लेकर विदेश मंत्रालय ने स्थिति स्पष्ट की है। मंत्रालय का कहना है कि किसी भी विदेशी नागरिक को उसके देश वापस भेजने के लिए निर्धारित कानूनी और द्विपक्षीय प्रक्रिया का पालन किया जाता है। संबंधित देश द्वारा नागरिकता की पुष्टि के बाद ही निर्वासन की कार्रवाई आगे बढ़ाई जाती है।
विदेश मंत्रालय ने बताया निर्वासन का तरीका
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रधींर जैसवाल ने कहा कि भारत में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों के खिलाफ देश के कानूनों के अनुसार कार्रवाई की जाती है। उन्होंने बताया कि यदि किसी व्यक्ति की नागरिकता को लेकर संदेह होता है, तो उसका विवरण संबंधित देश की सरकार को भेजा जाता है। वहां से नागरिकता की पुष्टि होने के बाद ही निर्वासन की औपचारिक प्रक्रिया पूरी की जाती है।
द्विपक्षीय सहयोग की अहम भूमिका
प्रवक्ता के अनुसार, निर्वासन की प्रक्रिया केवल एकतरफा निर्णय नहीं होती, बल्कि इसमें दोनों देशों के बीच समन्वय और सहयोग आवश्यक होता है। संबंधित देश की ओर से नागरिकता की पुष्टि और यात्रा संबंधी आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराए जाने के बाद ही व्यक्ति को वापस भेजा जाता है। इसी वजह से कई मामलों में प्रक्रिया पूरी होने में समय लग सकता है।
नेपाल के साथ संबंधों पर भी हुई चर्चा
विदेश मंत्रालय ने नेपाल के विदेश मंत्री के भारत दौरे को लेकर भी जानकारी दी। मंत्रालय के अनुसार, दोनों देशों के बीच विकास सहयोग, व्यापार, निवेश और लोगों के आपसी संबंधों को और मजबूत बनाने पर चर्चा होगी। भारत और नेपाल के बीच लंबे समय से घनिष्ठ संबंध रहे हैं और दोनों पक्ष विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए लगातार संवाद बनाए हुए हैं।
रक्षा संबंधी सवाल पर मंत्रालय का जवाब
मीडिया ब्रीफिंग के दौरान रूस के लड़ाकू विमान कार्यक्रम से जुड़े सवाल भी पूछे गए। इस पर विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग मजबूत और दीर्घकालिक है, लेकिन ऐसे तकनीकी और रक्षा खरीद से जुड़े विषयों पर विस्तृत जानकारी रक्षा मंत्रालय द्वारा ही उपलब्ध कराई जा सकती है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि संबंधित मामलों पर आधिकारिक जानकारी उचित विभाग से प्राप्त की जानी चाहिए।