
दिल्ली में प्रदूषण से हालात बदतर हो चुके हैं। यहां पर एक्यूआई का स्तर 300 के पार पहुंच चुका है। ऐसे में बिगड़ते हालात को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है। अदालत ने बंद पड़े वायु निगरानी स्टेशनों को लेकर एक रिपोर्ट मांगी है। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि ज्यादातर स्टेशन काम नहीं कर रहे हैं। ऐसे में सवाल खड़े होते हैं कि अहम आंकड़ों के न होने के कारण ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) को प्रभावी ढंग से किस तरह से लागू किया जा सकता है।
निर्देश जारी करने की अपील
एमिकस क्यूरी अपराजिता सिंह ने अदालत को जानकारी दी कि वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी)को बढ़ते प्रदूषण स्तर को नियंत्रित करने को लेकर एहतियात भरे उपाय करने के निर्देश जारी करने की अपील की है।
उन्होंने कहा कि हालात को देखकर कार्रवाई करनी होगी। इस तरह की खबरें हैं कि निगरानी केंद्र बेकार पड़े हुए हैं। कोर्ट का कहना है कि अगर केंद्र काम नहीं कर रहे तो हमें नहीं पता कि ग्रेप को कब लागू किया जाएगा। उन्हें हालात का जवाब देना चाहिए। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि दीवाली के वक्त 37 में से केवल 9 निगरानी केंद्र की चालू बताए हैं।
उठाए कदम का विवरण देने का निर्देश
वकील ने पूछा कि अगर ऐसा है तो किस तरह से पता करें कि GRAP को कब लागू किया जाए। इस पर भारत के मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई ने सीएक्यूएम और सीपीसीबी को वायु गुणवत्ता को अधिक खराब होने से रोकने को लेकर उठाए कदम पूरा ब्योरा देने का निर्देश दिया है। जानकारी के तहत दिल्ली में सोमवार को धुंध छाई रही यहां पर प्रदूषण का स्तर काफी खराब हालात में पाया गया। शहर की वायु गुणवत्ता 'बेहद खराब' श्रेणी मे रखी गई। सीपीसीबी के अनुसार, दिल्ली में समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 316 दर्ज किया गया। ये प्रदूषण के लगातार बने रहने के संकेत सामने आए। अधिकतर केंद्रों ने ये 300 रहा। यह 'बेहद खराब' श्रेणी में माना जाता है।