Jantar Mantar Protest: जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन मामले में सुप्रीम कोर्ट के साफ निर्देशों के बावजूद ग्रेटर नोएडा के एक छात्र को नोटिस जारी करने पर सर्वोच्च अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। देश के मुख्य न्यायाधीश CJI सूर्यकांत ने मजिस्ट्रेट की इस कार्रवाई पर कहा कि जिस्ट्रेट की इतनी हिम्मत कैसे हुई? जबकि हमारा स्पष्ट आदेश था कि किसी भी छात्र के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी।
CJI की सख्त टिप्पणी
CJI सूर्यकांत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि मजिस्ट्रेट की नोटिस जारी करने की हिम्मत कैसे हुई? हमने स्पष्ट किया था कि किसी भी छात्र के खिलाफ कोई जबरदस्ती की कार्रवाई नहीं होगी। आगे उन्होंने कहा कि कोई भी मजिस्ट्रेट उस आदेश का उल्लंघन नहीं कर सकता। CJI ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश इतना सरल और स्पष्ट था कि इसे कोई भी आम इंसान समझ सकता है।ऐसे में कोई भी मजिस्ट्रेट उस आदेश की अनदेखी नहीं कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस लापरवाही के लिए संबंधित मजिस्ट्रेट से जवाब-तलब किया जाएगा।
क्या है पूरा मामला
बता दें कि 1 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों के प्रदर्शन के संदर्भ में आदेश पारित करते हुए उनके खिलाफ किसी भी तरह की कठोर कार्रवाई पर रोक लगाई थी। कोर्ट ने साफ किया था कि किसी भी छात्र के खिलाफ कोई जबरन कार्रवाई नहीं की जाएगी। इसके बावजूद ग्रेटर नोएडा में पुलिस के इनपुट पर एक कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने सेकेंड ईयर के एक छात्र को नोटिस थमा दिया। हालांकि प्रशासन ने बाद में यह नोटिस वापस ले लिया, लेकिन यह मुद्दा सुप्रीम कोर्ट के समझ उठाया गया।
छात्रों के वकील ने क्या कहा
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि यह नोटिस गौतम बुद्ध नगर प्रशासन द्वारा तामील कराया जाना था, लेकिन बाद में इसे वापस ले लिया गया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बाद भी छात्रों को नोटिस भेजना अदालत की अवमानना है और यह देश के छात्रों के अधिकारों के साथ एक तरह का खिलवाड़ है।
यह भी पढ़ें: School Closed: दिल्ली में 11 सितंबर को सभी स्कूल रहेंगे बंद, जानिए कॉलेज को लेकर क्या है अपडेट
पुलिस जांच को लेकर कोर्ट ने दी थी ये छूट
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 20 से 25 जुलाई के बीच जंतर-मंतर और देश के अन्य शहरों में हुए छात्र प्रदर्शनों के मामले में दर्ज सभी एफआईआर को रद्द करने और उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई पर रोक लगाई थी। लेकिन दिल्ली पुलिस को यह छूट भी दी थी कि अगर कोई ऐसा व्यक्ति प्रदर्शन में शामिल था, जिस पर पहले से गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं या जिसमें सुरक्षाकर्मियों पर हमला और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया है। उसके खिलाफ नई एफआईआर दर्ज कर जांच की जा सकती है।