क्या कभी आपने सोचा है कि Dream 11, My Circle App से सरकार कितने रुपये कमाती है, अगर नहीं जानते तो आज आपको इस आर्टिकल में सबकुछ बताते हैं. दरअसल जितने पैरे में 17 मिनि AIIMS खुल सकते हैं, भारत में बुलेट ट्रेन दौड़ सकती है, उससे भी ज्यादा पैसे मोदी सरकार गेमिंग ऐप से कमा रही है, ये सुनकर आपको भी हैरानी होगी, लेकिन ये सच है कि खबरों की मानें तो हिंदुस्तान में चल रहे 300 से 400 गेमिंग एप से केंद्र सरकार को 16000 से 17000 करोड़ की सालाना कमाई होती है और इसमें Dream 11 का हिस्सा ज्यादा है क्योंकि वो बड़ा प्लेटफार्म है. गेमिंग ऐप पर 28% जीएसटी लागू है जो कंपनी भरती है. जबकि जो लोग 3 करोड़ जीतते हैं उन्हें 30% टीडीएस काटकर पैसा मिलता है और टीडीएस सरकार के खाते में जमा हो जाता है. इसके अलावा ड्रीम 11 जो आईपीएल के विज्ञापन पर खर्च करती है. लोगों को नौकरी पर रखा है वो भी अलग से लाखों रुपए अप्रत्यक्ष तौर पर टैक्स देते हैं.
17 हजार करोड़ से ज्यादा की गेमिंग ऐप से कमाई !
गेम्स क्राफ्ट गेम 24 * 7 मोबाइल प्रीमियर लीग, बिग कैश लाइफ और फर्स्ट गेम जैसे कई गेमिंग ऐप के करोड़ों यूजर हिंदुस्तान में हैं. जहां से करोड़ों की कमाई सरकार को हो रही है. यानी यह रकम बड़ी है. लेकिन सवाल है देश के युवा ही जब गलत रास्ते पर होंगे तो फिर देश कैसे आगे बढ़ेगा? जिन गेमिंग ऐप से युवा पढ़ाई से दूर रहे, काम में उनका मन नहीं लग रहा, परिवार की चिंताएं बढ़ रही, बीमारियां घेरती जा रही है, उनसे सरकार जितना कमा रही है, जरा उसमें क्या-क्या हो सकता है, वो भी देख लीजिए. ऐसा बताया जाता है कि ₹17,000 करोड़ में देश में 17 मिनी AIIMS खुल सकते हैं. बुलेट ट्रेन का 80 कि.मी. रेलवे ट्रैक बन सकता है. भोपाल की तरह दो-तीन स्मार्ट सिटी, 800 मॉडर्न स्कूल और यूपी के 75 जिले में 100 बेड का अस्पताल खुल सकता है. ये वो आंकड़े हैं जो इंटरनेट पर अनुमान के आधार पर उपलब्ध हैं.
ड्रीम-11 से BCCI की करोड़ों में है कमाई
इसके अलावा BCCI भी सालाना करीब 200 करोड़ की कमाई अकेले ड्रीम 11 से कर रही है. जिसने मैच में टाइटल स्पॉन्सरशिप समेत तमाम चीजें ली है. जिसका सीधा सा मतलब है गेमिंग कंपनियां सरकार के लिए कमाई का जरिया बन चुकी हैं लेकिन बावजूद इसके हिंदुस्तान के तीन राज्य आसाम, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश इसको बैन किए हुए हैं. बीते कुछ सालों में जिस तरीके की खबरें सामने आई लाखों लाख रुपए लोगों ने गेमिंग कंपनियों के चक्कर में गवाए परिवार तक में टूट की स्थिति हो गई. पढ़ने लिखने वाले लड़कों की स्थिति बिगड़ गई. उसे देखते हुए क्या सरकार को कोई उचित एक्शन लेना होगा? क्योंकि सुप्रीम कोर्ट तो इसे पहले ही गेमिंग कौशल बता चुका है. अब गेंद केंद्र सरकार के पाले में है. सरकार क्या करती है ये देखना होगा