सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित होता है. इस दौरान लाखों श्रद्धालु कांवड़ यात्रा पर निकलते हैं और पवित्र नदियों से जल लेकर शिवलिंग पर अर्पित करते हैं. यह यात्रा आस्था, संयम और तपस्या का प्रतीक मानी जाती है. लेकिन अगर आप किसी कारणवश कांवड़ यात्रा नहीं कर पा रहे हैं तो भी आप सावन में शिवजी की पूजा कर सकते हैं और पुण्य कमा सकते हैं.
कब और कैसे करें जल अर्पण?
अगर आप कांवड़ यात्रा नहीं कर सके हैं, तो सावन की शिवरात्रि के दिन शिवजी को जल अर्पित करना सबसे उत्तम माना गया है. इस साल सावन की शिवरात्रि 23 जुलाई 2025 को है. इस दिन भगवान शिव को जल चढ़ाने से कांवड़ यात्रा जितना पुण्य फल प्राप्त होता है.
जल अर्पण का सही समय
1. सुबह स्नान के बाद
2. प्रदोष काल (शाम)
3. रात्रि के चारों प्रहरों में जल अर्पण करना श्रेष्ठ होता है.
जल अर्पण की विधि
सबसे पहले गंगाजल या किसी पवित्र नदी का जल एक तांबे के लोटे या श्रृंगी में भरें. शिवलिंग पर यह जल अर्पित करते समय महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें. जल चढ़ाने के बाद बेलपत्र, भांग, धतूरा, मदार के फूल, चंदन, शहद और अक्षत (चावल) आदि शिवलिंग पर चढ़ाएं. कोशिश करें कि इस दिन 24 घंटे का व्रत रखें और रात में भजन-कीर्तन करें.
जनसेवा भी है शिव सेवा
सावन की शिवरात्रि के दिन गरीबों को अन्न, वस्त्र या धन का दान करें. पशु-पक्षियों को भी भोजन और जल दें. मान्यता है कि हर जीव में शिव का वास है इसलिए यह सेवा भी शिव साधना के समान मानी जाती है.
अगर आप इस बार कांवड़ यात्रा नहीं कर पा रहे हैं, तो सावन की शिवरात्रि पर श्रद्धा और नियमपूर्वक शिवलिंग पर जल चढ़ाएं. इससे भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और आपकी मनोकामना भी पूर्ण करते हैं.