उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के मलिहाबाद थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है. जिसमें सलाउद्दीन उर्फ 'लाला' (68) को उसके घर पर चल रही अवैध असलहा फैक्ट्री में दबोच लिया. एक गुप्त सूचना के बाद संयुक्त पुलिस दल ने मिर्जागंज के पुराने सिनेमा हाल के पास तलाशी ली. जिसमें आरोपी के कब्जे से हथियार निर्माण के उपकरण, देशी इलाक़ों में बिकने वाले तमंचे, एयरगन, दर्जनों जिंदा कारतूस और एक प्रतिबंधित हिरन की खाल बरामद हुई. जिससे आयुध अधिनियम के साथ-साथ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम का भी उल्लंघन सामने आया है. यह कार्रवाई पुलिस के लिए एक चौंकाने वाला खुलासा साबित हुई है, जिससे इलाके में फैली अवैध असलहा निर्माण-राहत की परतें उधड़ गईं.
पुलिस को कैसे मिली सूचना ?
पुलिस को यह महत्वपूर्ण सूचना स्थानीय मुखबिर के माध्यम से मिली कि मलिहाबाद थाना क्षेत्र के मिर्जागंज कस्बे में एक हकीम घर में हथियारों की अवैध फैक्ट्री चला रहा था. देर शाम लगभग 6 बजे यह सूचना आई, जिसके बाद मलिहाबाद, माल और रहीमाबाद थानों की संयुक्त टीम ने पुराने सिनेमा हाल के पास स्थित आरोपी सलाउद्दीन उर्फ़ “लाला” के घर छापा मारा और उसे रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया.
कहां बनाता था असलहा ?
पुलिस की जांच में स्पष्ट हुआ कि आरोपी सलाउद्दीन उर्फ़ 'लाला' अपने घर में, मलिहाबाद थाने से महज़ 100 मीटर दूर, मिर्जागंज इलाके में स्थित पुराने सिनेमा हाल के बगल ही अवैध असलहा‑फैक्ट्री चलाता था. आरोपियों ने इस ठिकाने पर घरेलू वातावरण में तमंचे, राइफल और एयरगन जैसे हथियार बनाने के लिए उपकरण, अधबने बट और भारी मात्रा में कारतूस रखे थे. इस छापे के दौरान पुलिस ने घर और उससे सटे परिसर में सैकड़ों असलहे और उपकरण बरामद किए . मन जा रहा है कि यह एक ऐसा सक्रिय नेटवर्क था जो घरेलू स्तर पर अवैध शस्त्र निर्माण और सप्लाई कर रहा था.
कार्रवाई के दौरान क्या क्या बरामद हुआ?
पुलिस कार्रवाई के दौरान सलाउद्दीन उर्फ़ ‘लाला’ के घर और उसके साथ लगे पुराने सिनेमा हाल से जब्त की गई महत्वपूर्ण सामग्री इस प्रकार है:
3 देसी पिस्टल (.32), 1 देसी पिस्टल (.315), 2 देसी पिस्टल (.22), 1 राइफल (.22), 7 एयरगन, अध-निर्मित बट और असलहा बनाने के उपकरण बरामद हुए हैं.
पूछताछ में आरोपी ने क्या क्या कुबूला?
पूछताछ में सलाउद्दीन उर्फ़ ‘लाला’ ने पुलिस के सामने कई अहम बातें स्वीकार की हैं-
उसने माना कि वह अपने घर में ही अवैध असलहा बनाता और बेचता था, जो वह हकीम की दवा दुकान की आड़ में छुपाता था.
उसने देशी तमंचे लगभग ₹15,000 में बेचने का खुलासा किया और बताया कि उसने इन हथियारों की आपूर्ति कई राज्यों में की थी.
आरोपी ने स्वीकार किया कि उसके पाकिस्तान (पीओके) में रिश्तेदारों हैं और हाल ही में वह कश्मीर गया था. पुलिस संदेह कर रही है कि इससे उसका हथियार नेटवर्क जुड़ा हो सकता है.
साथ ही उसने बताया कि वन्यजीव हिरन की खाल भी उसने अवैध तरीके से रखी थी, जिससे वन्यजीव संरक्षण अधिनियम का उल्लंघन हुआ
पुलिस की जांच कहां तक पहुंची?
पुलिस की जांच अब गहराई से आगे बढ़ चुकी है और कई नई परतों को उजागर किया गया है. आरोपी सलाउद्दीन के कॉल रिकॉर्ड और मोबाइल फोरेंसिक विश्लेषण में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) के संदिग्ध नंबरों से संपर्क मिलने की बात सामने आई है, जिसके आधार पर एटीएस भी इस मामले में सक्रिय हो गई है.
मलिहाबाद थाने से मात्र 100 मीटर की दूरी पर आरोपी द्वारा बहुत समय से चल रही फैक्ट्री और इसके नेटवर्क को ध्यान में रखते हुए पुलिस एसटीएफ, एटीएस, स्थानीय दलों के साथ मिलकर आरोपी के सहयोगियों और ग्राहकों की तलाश कर रही है.
शुरुआती पूछताछ में आरोपी ने साफ़ किया कि वह देसी तमंचे लगभग ₹15,000 में बेचता था और उन्हें कई राज्यों में सप्लाई करता था. जिससे यह संकेत मिला कि अवैध निर्माण सिर्फ छिपा कारोबार नहीं बल्कि व्यापक आपूर्ति नेटवर्क था .
एडीसीपी सहित उच्चस्तरीय अधिकारियों की मौजूदगी में आरोपी के घर और आसपास व्यापक गहन तलाशी ली गई. जिसमें मोबाइल, लैपटॉप जैसी सामग्रियों की फॉरेंसिक समीक्षा शुरू हो चुकी है. इससे यह स्पष्ट हो गया है कि पुलिस
योजना और नेटवर्क को डिजिटल साक्ष्य से उजागर करने में जुटी है.
खुफिया विभागों की जानकारी पर संदिग्धों के आवागमन और असलहा निर्माण से जुड़ी सम्पूर्ण जानकारी जुटा रही पुलिस ने आस-पास के किराए पर लिए गए कमरों और सहयोगियों की पहचान शुरू कर दी है.
मामले में क्या है पाकिस्तान से कनेक्शन?
उसके मोबाइल कॉल और डेटा फॉरेंसिक विश्लेषण के दौरान पीओके (पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर) के संदिग्ध नंबरों से नियमित संपर्क पाया गया, जिससे एटीएस ने भी मामले में स्वतः संलिप्तता दर्ज की है. पुलिस सूत्रों की रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी के किराए के कमरों का इस्तेमाल ऐसे संदिग्ध लोगों द्वारा किया जा रहा था, जिनका सम्बन्ध पाकिस्तान में रह रहे लोगों से हो. वहीं अक्टूबर–नवंबर में पकड़े गए फोन रिकॉर्ड से यह स्पष्ट हुआ कि आरोपी के केवल घरेलू ग्राहक ही नहीं है, बल्कि वो पीओके से संभावित लिंक रखने वाले नेटवर्क का हिस्सा है. एटीएस की सक्रिय भागीदारी इस बात पर जोर देती है कि मामले में संभावित पाकिस्तान-आधारित हथियार तस्करी भी उभरकर सामने आ सकती है.