
बांग्लादेश में शेख हसीना के शासनकाल में हूजी पर काफी हद तक नियंत्रण रखा गया था। उनके सत्ता से जाने के बाद अंतरिम सरकार में एक बार फिर अपनी गतिविधियों को बढ़ाया है।
हूजी मूलरूप से पाकिस्तान मे पैदा हुआ था। इसका लक्ष्य आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के साथ मिलकर जम्मू कश्मीर में हमला करके अशांति को फैलाना था। कश्मीर में जैश-ए-मोहम्मद के तेजी से बढ़ने की कोशिश के बीच आईएसआई ने धीरे-धीरे इस संगठन (हूजी) की गतिविधियों को बांग्लादेश में स्थानांतरित कर दिया। इसका लक्ष्य पश्चिम बंगाल और भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को निशाना बनाना था।
इस गुट पर शिकंजा कसा
हूजी पूर्वोत्तर भारत और पश्चिम बंगाल में कई गुट स्थापित करने में सफल हुआ था। बीते कुछ वर्षों में भारतीय एजेंसियों की कड़ी सुरक्षा और निगरानी की वजहे से यह संगठन पीछे हट गया।
बांग्लादेश की शेख रहसीना सरकार ने इस गुट पर शिकंजा कसा। जमात-ए-इस्लामी समर्थित मुहम्मद यूनुस को अंतरिम सरकार का कार्यवाहक बनाए जाने के बाद हूजी समेत कई कट्टरपंथी गुट दोब फिर से सक्रिय हो गए हैं।
न्यूयॉर्क में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बुधवार को यूनुस के साथ बैठक की। इस बैठक का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाना बताया गया है, लेकिन इस बात की आशंका भी जताई जा रही है कि पाकिस्तान और बांग्लादेश की नजदीकियां बढ़ने से आईएसआई के लिए बांग्लादेश तक पहुंचना बेहद आसान हो गया।
खुफिया ब्यूरो के अधिकारियों का कहना है कि पिछले तीन महीनों में आईएसआई और हूजी नेताओं के बीच कम से कम छह बैठकें हुई हैं। इन सभी का उद्देश्य संगठन की गतिविधियों को पुनर्जीवित करना और भारतीय सीमा के पास और गुट स्थापित करना है। जमात ने हूजी को सुरक्षा की गारंटी भी दी है। इस प्रक्रिया में हूजी को हथियारों, गोला-बारूद और धन मुहैया कराने का भरोसा दिया गया है। बांग्लादेश में हूजी के एक बार फिर से एक्टिव होने के पीछे एक वजह अब्दुस सलाम पिंटू की रिहाई भी बताई जा रही है।