श्योपुर जिले में हाईवे किनारे लावारिस हालत में मिली 2 साल की बच्ची का मामला अब एक बड़े मानव तस्करी नेटवर्क के खुलासे में बदल चुका है। शुरुआती तौर पर यह घटना साधारण लग रही थी, लेकिन पुलिस जांच ने चौंकाने वाले तथ्य सामने रखे हैं। बच्ची को जन्म के कुछ ही दिनों बाद बेचा गया और वह कई लोगों के हाथों से गुजरती रही। इस मामले में अब तक 6 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
हाईवे से शुरू हुई जांच, खुला बड़ा राज
18 अप्रैल को सोंईकलां के पास हाईवे किनारे एक 2 साल की बच्ची लावारिस हालत में मिली थी। इस घटना ने पुलिस को सतर्क कर दिया। आसपास के इलाकों में पूछताछ और जांच के बाद जब कोई सुराग नहीं मिला, तो पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों का सहारा लिया। यहीं से एक संगठित अपराध की कहानी सामने आने लगी।
सीसीटीवी फुटेज बना अहम सुराग
जांच के दौरान पुलिस ने हाईवे के सीसीटीवी कैमरों को खंगाला। एक संदिग्ध कार की धीमी रफ्तार ने पुलिस का ध्यान खींचा। वाहन नंबर के आधार पर मालिक की पहचान की गई, जो राजगढ़ का निवासी निकला। इसी कड़ी से पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश शुरू हुआ और कई नाम सामने आए।
6 दिन की बच्ची का हुआ सौदा
पुलिस जांच में सामने आया कि बच्ची का सौदा 21 नवंबर 2024 को किया गया था, जब वह महज 6 दिन की थी। सबसे पहले उसे एक महिला से लिया गया, फिर अलग-अलग लोगों के माध्यम से आगे बेचा गया। आखिरकार यह बच्ची लगभग 1 लाख रुपए में एक दंपती तक पहुंची। इस दौरान बच्ची कई बार हाथ बदलती रही।
ब्यूटी पार्लर बना नेटवर्क का केंद्र
जांच में इंदौर का एक ब्यूटी पार्लर इस पूरे नेटवर्क का अहम केंद्र बनकर उभरा है। यहीं से सप्लायर और खरीदार आपस में जुड़े। पुलिस को शक है कि इस जगह का इस्तेमाल लंबे समय से ऐसे अवैध सौदों के लिए किया जा रहा था। फिलहाल इस एंगल पर गहराई से जांच जारी है।
35 घंटे में तीन जिलों में कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तीन विशेष टीमें बनाई। करीब 20 पुलिसकर्मियों ने लगातार 35 घंटे तक ऑपरेशन चलाकर इंदौर, धार और खरगौन में दबिश दी। इस दौरान 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। सभी को श्योपुर लाकर पूछताछ की जा रही है और बच्ची के असली माता-पिता की तलाश जारी है।