Humayun Kabir: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों मुर्शिदाबाद के विधायक हुमायूं कबीर सबसे चर्चित नाम बन गए हैं। बाबरी मस्जिद शिलान्यास को लेकर दिए गए बयान के बाद तृणमूल कांग्रेस द्वारा निलंबित किए गए कबीर अब ममता बनर्जी पर खुलकर हमला कर रहे हैं। उन्होंने ममता को आरएसएस का एजेंट तक कह दिया और घोषणा की कि वे आगामी विधानसभा चुनाव नई पार्टी बनाकर लड़ेंगे। 22 दिसंबर को नई पार्टी का ऐलान होगा, जो राज्य की 135 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी AIMIM के साथ गठबंधन में चुनाव मैदान में उतरेगी।
कबीर का राजनीतिक सफर
हुमायूं कबीर मुर्शिदाबाद के भरतपुर से विधायक हैं और उन्हें जिले का चतुर राजनीतिक खिलाड़ी माना जाता है। राजनीतिक यात्रा की शुरुआत उन्होंने कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी के करीबी सहयोगी के रूप में की। 2009 में कांग्रेस की मुर्शिदाबाद इकाई के महासचिव बने और 2011 में रेजिनगर से कांग्रेस टिकट पर पहली बार विधायक चुने गए। लेकिन एक साल बाद ही अधीर रंजन से मतभेद के बाद उन्होंने टीएमसी का दामन थाम लिया। उपचुनाव में हार के बाद 2015 में पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते टीएमसी ने उन्हें छह साल के लिए निलंबित कर दिया। इसके बाद वे 2018 में बीजेपी में शामिल हुए और 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ा, हालांकि हार गए। 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले वे फिर टीएमसी में लौटे और भरतपुर से विधायक बने।
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विवादों और बयानों से घिरा करियर
हुमायूं कबीर अपने तीखे बयानों के कारण अक्सर विवादों में रहे हैं। अप्रैल 2025 में वक्फ बिल को लेकर मुर्शिदाबाद में हुए सांप्रदायिक तनाव के दौरान उनके बयानों पर काफी आलोचना हुई थी। बाबरी मस्जिद शिलान्यास की घोषणा ने उन्हें फिर राजनीतिक तूफान के केंद्र में ला खड़ा किया, जिसके बाद टीएमसी ने उन्हें निलंबित कर दिया। अब नई पार्टी के गठन और AIMIM के साथ गठबंधन की घोषणा ने राज्य की राजनीति में नया समीकरण खड़ा कर दिया है, जो 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा प्रभाव डाल सकता है।