पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक और नए दल की एंट्री होने जा रही है। 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर आज सोमवार को अपनी नई पार्टी की घोषणा करेंगे। यह ऐलान मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा क्षेत्र के मिर्जापुर मोड़ पर एक बड़ी जनसभा के जरिए किया जाएगा। इस राजनीतिक कदम को सत्तारूढ़ दल के लिए एक नई चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है।
पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न को लेकर तैयारी पूरी
सूत्रों के अनुसार हुमायूं कबीर की नई पार्टी का नाम “जनता उन्नयन पार्टी” हो सकता है। बताया जा रहा है कि पार्टी गठन के साथ ही वे आगामी विधानसभा चुनावों के लिए पांच प्रत्याशियों के नामों का भी ऐलान कर सकते हैं। चुनाव चिह्न के रूप में वे पहले इस्तेमाल कर चुके “टेबल” निशान को ही प्राथमिकता देंगे। यदि यह चिह्न उपलब्ध नहीं हुआ तो उनकी दूसरी पसंद “जोड़ा गुलाब” हो सकती है।
निर्दलीय से विधायक और अब पार्टी प्रमुख बनने की राह
हुमायूं कबीर मुर्शिदाबाद की भरतपुर विधानसभा सीट से विधायक हैं। वर्ष 2016 में उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी। बाद में वे तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए, लेकिन हालिया विवादों के बाद पार्टी से निलंबित कर दिए गए। अब वे एक बार फिर स्वतंत्र राजनीतिक पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
मस्जिद निर्माण विवाद बना सियासी मोड़
हुमायूं कबीर ने 6 दिसंबर को बेलडांगा-रेजीनगर इलाके में बाबरी मस्जिद के मॉडल पर आधारित एक नई मस्जिद की प्रतीकात्मक नींव रखी थी। यह ढांचा मूल बाबरी मस्जिद से छोटा बताया गया है। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और चंदे के जरिए करोड़ों रुपये जुटने की बात सामने आई।
राजनीतिक तापमान बढ़ने के संकेत
इस घटनाक्रम के बाद प्रदेश की राजनीति में धार्मिक और राजनीतिक विमर्श तेज हो गया। विरोधियों ने इसे ध्रुवीकरण की कोशिश बताया, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने खुद को इस मुद्दे से अलग करते हुए हुमायूं कबीर पर कार्रवाई की। अब नई पार्टी के ऐलान के साथ यह देखना अहम होगा कि इसका असर 2026 के चुनावी समीकरणों पर कितना पड़ता है।