हंगरी का रूसी तेल पर झुकाव, यूक्रेन बोला- शिकायत हमसे नहीं रूस से करो
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हंगरी का रूसी तेल पर झुकाव, यूक्रेन बोला- शिकायत हमसे नहीं रूस से करो
लोकसत्य
बुधवार, 20 अगस्त 2025 • 2:24 pm
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रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच हंगरी का रुख लगातार चर्चा में है। नाटो का सदस्य होने के बावजूद हंगरी रूस के करीब दिखाई देता है और बड़े पैमाने पर तेल की खरीद भी करता है। हाल ही में रूस की तेल पाइपलाइन पर हमले के बाद हंगरी ने यूक्रेन की आलोचना की थी। इस पर यूक्रेन ने पलटवार करते हुए साफ कहा कि जंग की शुरुआत उसने नहीं की है, अगर हंगरी को कोई समस्या है तो उसका जवाब रूस से मांगे, न कि हमसे।
परमाणु हथियार छोड़ने से कमजोर हुआ यूक्रेन
विशेषज्ञ मानते हैं कि यूक्रेन की मौजूदा स्थिति उसकी पिछली परमाणु नीति से भी जुड़ी हुई है। सोवियत संघ के विघटन के बाद यूक्रेन ने अपने परमाणु हथियार छोड़ दिए थे। माना जाता है कि यही उसकी सबसे बड़ी कमजोरी बन गई। अगर उसके पास आज भी परमाणु हथियार होते, तो रूस के सामने इतनी असमान स्थिति में नहीं खड़ा होना पड़ता।
हंगरी का रूस की ओर झुकाव
हंगरी का रुख इस युद्ध में विशेष ध्यान खींच रहा है। नाटो का सदस्य होते हुए भी हंगरी बार-बार रूस का समर्थन करता नजर आया है। इतना ही नहीं, वह रूस से तेल की बड़ी मात्रा में खरीद भी जारी रखे हुए है। रूस की पाइपलाइन पर हमले के बाद जब हंगरी ने यूक्रेन पर सवाल उठाए, तो यह स्पष्ट हो गया कि उसका रुख पश्चिमी देशों से अलग है।
यूक्रेन का पलटवार
हंगरी की आलोचना पर यूक्रेन ने भी सख्त प्रतिक्रिया दी। यूक्रेन का कहना है कि युद्ध की शुरुआत उसने नहीं की, बल्कि रूस ने हमला किया था। अगर हंगरी को किसी भी तरह की समस्या है तो उसे रूस से शिकायत करनी चाहिए, क्योंकि असली आक्रामक वही है। यूक्रेन का यह बयान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसके संघर्ष और अलग-थलग पड़ते हालात को भी दर्शाता है।