मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में एक पति की 17 वर्षों लंबी तलाश चर्चा का विषय बनी हुई है। अपनी पत्नी के लापता होने के बाद उसने न्याय और सच्चाई की खोज में लगातार संघर्ष किया। इस दौरान उसने आर्थिक परेशानियां झेलीं, जमीन तक बेच दी और कर्ज भी लिया। अब उसका दावा है कि जिस पत्नी को पुलिस वर्षों तक नहीं खोज सकी, उसका पता उसने खुद लगा लिया है और मामले में कार्रवाई की मांग कर रहा है।
17 साल से न्याय की तलाश में भटक रहा पति
राजगढ़ जिले के रहने वाले बने सिंह तंवर का आरोप है कि उनकी पत्नी वर्षों पहले घर छोड़कर चली गई थी। इसके बाद उन्होंने पुलिस और प्रशासन से मदद की गुहार लगाई, लेकिन लंबे समय तक उन्हें कोई ठोस परिणाम नहीं मिला। उनका कहना है कि बीते 17 वर्षों में उन्होंने थाने से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों तक अपनी शिकायत पहुंचाई, लेकिन पत्नी का पता लगाने में सफलता नहीं मिल सकी।
पत्नी का सुराग खुद पति ने लगाया
पीड़ित का दावा है कि लगातार प्रयासों और निजी स्तर पर की गई खोजबीन के बाद आखिरकार उसने अपनी पत्नी का पता खुद लगाया। उसके अनुसार, पत्नी अब राजस्थान में रह रही है और वहां उसने अपना नाम व पता बदल लिया है। पति का आरोप है कि वह किसी अन्य व्यक्ति के साथ रह रही है तथा आंगनबाड़ी में नौकरी भी कर रही है। इस संबंध में उसने पुलिस को जानकारी और दस्तावेज उपलब्ध कराने का भी दावा किया है।
तलाश में बिक गई जमीन, बढ़ गया कर्ज
पत्नी की खोज में बने सिंह ने अपना काफी समय और संसाधन खर्च किए। उनका कहना है कि अलग-अलग जगहों पर खोजबीन करने और कानूनी प्रक्रिया में लगातार प्रयास करने के कारण उन्हें आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा। उन्होंने अपनी जमीन तक बेच दी और कर्ज लेकर तलाश जारी रखी। इसके बावजूद उन्होंने उम्मीद का दामन नहीं छोड़ा।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
पीड़ित ने पुलिस पर मामले में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यदि शुरुआती दौर में गंभीरता से कार्रवाई की जाती, तो उन्हें इतने वर्षों तक भटकना नहीं पड़ता। उन्होंने सवाल उठाया कि जब वह स्वयं पत्नी का पता लगाने में सफल हो गए, तो संबंधित एजेंसियां ऐसा क्यों नहीं कर सकीं।
उच्च अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग
अब बने सिंह प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि पूरे मामले की गहराई से जांच होनी चाहिए और उन्हें न्याय मिलना चाहिए। 17 वर्षों के लंबे संघर्ष के बाद भी वह उम्मीद लगाए बैठे हैं कि उनकी शिकायत पर प्रभावी कार्रवाई होगी और उन्हें अपने सवालों के जवाब मिलेंगे।