राजधानी भोपाल में शुरू हो रहे तीन दिवसीय IAS सर्विस मीट से पहले ही विवाद गहराता नजर आ रहा है। विवादित बयान देकर सुर्खियों में आए आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा को इस आयोजन से दूर रखने की मांग तेज हो गई है। मंत्रालय अधिकारी-कर्मचारी संघ ने इसे महिला अधिकारियों की गरिमा और सम्मान से जोड़ते हुए आईएएस एसोसिएशन से कड़ा रुख अपनाने की अपील की है।
IAS सर्विस मीट की शुरुआत, लेकिन विवाद के साथ
भोपाल में 19 दिसंबर से IAS सर्विस मीट-2025 का आयोजन किया जा रहा है, जिसका उद्घाटन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे। यह आयोजन आमतौर पर प्रशासनिक व्यस्तताओं से इतर अधिकारियों को आपसी संवाद, मनोरंजन और ऊर्जा संचार का अवसर देता है। हालांकि इस बार मीट की चर्चा खेल और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से ज्यादा एक नाम को लेकर हो रही है—संतोष वर्मा।
संघ की अपील: संतोष वर्मा को न मिले प्रवेश
मंत्रालय अधिकारी-कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सुधीर नायक ने स्पष्ट तौर पर मांग की है कि विवादित आईएएस संतोष वर्मा को सर्विस मीट में प्रवेश न दिया जाए। उनका कहना है कि यह आयोजन अधिकारियों और उनके परिवारों के लिए तनावमुक्त माहौल देने के उद्देश्य से होता है। ऐसे में किसी विवादित चेहरे की मौजूदगी पूरे वातावरण को असहज बना सकती है।
महिला अधिकारियों की गरिमा का सवाल
संघ ने इस मुद्दे को महिला सम्मान से भी जोड़ा है। सुधीर नायक का कहना है कि संतोष वर्मा द्वारा प्रदेश की बेटियों को लेकर की गई अभद्र टिप्पणी बेहद आपत्तिजनक रही है। मध्य प्रदेश को महिला हितैषी राज्य बताया जाता है और ऐसे में महिला अधिकारियों की मौजूदगी में ऐसे अधिकारी का शामिल होना असहज स्थिति पैदा कर सकता है।
विवादित बयान और बढ़ता विरोध
गौरतलब है कि संतोष वर्मा ब्राह्मण समाज की बेटियों को लेकर दिए गए कथित विवादित बयान के बाद प्रदेशभर में विरोध का सामना कर रहे हैं। उनका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसके बाद कई संगठनों ने नाराजगी जाहिर की। बताया जा रहा है कि इस मामले की शिकायत दिल्ली तक पहुंच चुकी है, जिससे मामला और गंभीर हो गया है।
तीन दिन, मनोरंजन और सहभागिता का मंच
तीन दिवसीय इस सर्विस मीट में प्रदेशभर से वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अपने परिवारों के साथ शामिल होंगे। कार्यक्रम आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन अकादमी में आयोजित किया जा रहा है। इसमें मुख्य सचिव से लेकर कलेक्टर, संभागायुक्त, नगर निगम आयुक्त, एसडीएम और सहायक कलेक्टर तक शामिल होंगे। आयोजन का केंद्र खेलकूद, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और आपसी संवाद रहेगा।
अब फैसला IAS एसोसिएशन पर
अब सभी की निगाहें आईएएस एसोसिएशन के फैसले पर टिकी हैं कि वह इस मांग पर क्या रुख अपनाता है। यह निर्णय न सिर्फ आयोजन की गरिमा बल्कि प्रशासनिक संवेदनशीलता का भी संकेत माना जाएगा।